वैसे तो मेरी टी वी देखने की अधिक आदत नहीं ,पर कल शाम साढे सात बजे टी वी खोलकर बैठ गयी। शायद आई बी एन 7 पर एक कहानी दिखायी जा रही थी , एंकर की ओर से ही उसका इतने रोचक ढंग से प्रस्तुतीकरण किया गया कि मैं उसी चैनल पर अंटकी रह गयी। प्राचीन काल की बात है ,हर प्रकार से सुखी और संपन्न एक राजा किसी दैवी शक्ति की प्राप्ति के लिए एकाग्रचित्त हो मां काली की पूजा करने लगा। मां काली ने उसकी मनोकामना को पूरी करने के लिए सपने में उससे एक मनुष्य की बलि चढाने को कहा। राजा धर्म का पालन करनेवाला था , इसलिए बलात् किसी की बलि नहीं चढाना चाहता था , उसने राज्य में घोषणा करा दी कि उसे बलि चढाने के लिए एक व्यक्ति की आवश्यकता है , जो व्यक्ति बलि के लिए तैयार होगा , उसके परिवार का लालन पालन राज्य की ओर से किया जाएगा।
घोषणा के सालभर होने के बाद भी कोई व्यक्ति इसके लिए तैयार नहीं हुआ। दूसरे वर्ष राजा को देवी ने स्वप्न में पुन: इसी बात की याद दिलायी। जान की ही बलि देनी है , इसके लिए बूढे की बलि भी दी जा सकती है , उसने किसी बूढे को बलि के लिए उपस्थित होने को कहा , इसके एवज में परिवारवालों को बडे इनाम दिए जाने की घोषणा की। अपनी जान बहुत प्यारी होती है , इसके भी एक वर्ष बीत गए , कोई बूढा बलि के लिए तैयार नहीं हुआ। तीसरे वर्ष राजा ने फिर वही सपना देखा। राजा ने अपने स्तर को और गिराते हुए इस बात की घोषणा की कि जिसका कोई पागल या अपाहिज या किसी गंभीर बीमारी से पीडित कोई बच्चा हो , तो उसे बलि के लिए भेजा जाए , वह भी इनाम का हकदार होगा।
इनाम की राशि पर कोई ध्यान न देते हुए उसके बाद तो अभिभावक पागल और बीमार को अधिक छिपाकर रखना शुरू किया , ताकि राजा की दृष्टि न पड जाए और उसकी बलि न दे दी जाए। राजा परेशान चल ही रहा था कि चौथे वर्ष फिर बलि के लिए सपना आ गया। बलि के लिए किसी मनुष्य की खोज में राजा अनिश्चित दिशा की ओर चल पडे। इसके बाद कमर्शियल ब्रेक हुआ , और फिर एंकर की बातों से मालूम हुआ कि दरअसल बलि के बहाने भगवान की इच्छा तो राजा को एक सीख देने की थी। उत्सुकता और बढी , पर उसके बाद कहानी जैसे ही शुरू हुई , मेरे कालोनी की बिजली गायब । मेरी उत्सुकता बनी हुई है कि इससे आगे हुआ क्या ? आप पाठकों में से किसी ने इसे देखा हो , तो मेरी जिज्ञासा का समाधान करें कि बलि के बहाने आखिर राजा को क्या सीख मिली ?
इस कहानी के कारण कल से ही इस गंभीर विषय पर चिंतन चल रहा है कि जान कितनी प्यारी चीज होती है , अपनी भी और अपने परिवार वालों की भी , पर अपराधियों के लिए किसी की जान लेना कितना आसान होता है , गाजर मूली की तरह काट और भून डालते हैं लोगों को। वैसे तो प्रतिदिन मार काट की घटनाओं से अखबार और न्यूज चैनल अटे पडे रहते हैं , पर आज एक खास घटना की वजह से दिमाग बहुत तनाव में आ गया है। धनबाद से अपहरण किए गए एक बच्चे की हत्या किए जाने का समाचार सुनकर आज मेरा मन बहुत दुखी हो गया है। उसकी सूचना मुझे उसके स्कूल में पढनेवाले बहन के लडके से मिल रही है। मात्र 8 वर्ष की उम्र के इस बच्चे को अपराधियों ने किस बात की सजा दी , समझ में नहीं आता।
दस वर्ष पूर्व की एक घटना की याद पुन: मन को तकलीफ दे रही है , जब मेरे बडे बेटे के साथ पढनेवाले एक बच्चे का अपहरण उसी की कालोनी के अपराधी किस्म के कुछ बडे बच्चों ने किया था और आजतक उसका कुछ भी पता न चल पाया। अपराधियों को कोई सजा भी हो जाए , तो बच्चे तो अब लौट नहीं सकते । कैसे जी पाते होंगे उन बच्चों के माता पिता ? काश अपराधी उनके कष्टों को समझ पाते ?
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घोषणा के सालभर होने के बाद भी कोई व्यक्ति इसके लिए तैयार नहीं हुआ। दूसरे वर्ष राजा को देवी ने स्वप्न में पुन: इसी बात की याद दिलायी। जान की ही बलि देनी है , इसके लिए बूढे की बलि भी दी जा सकती है , उसने किसी बूढे को बलि के लिए उपस्थित होने को कहा , इसके एवज में परिवारवालों को बडे इनाम दिए जाने की घोषणा की। अपनी जान बहुत प्यारी होती है , इसके भी एक वर्ष बीत गए , कोई बूढा बलि के लिए तैयार नहीं हुआ। तीसरे वर्ष राजा ने फिर वही सपना देखा। राजा ने अपने स्तर को और गिराते हुए इस बात की घोषणा की कि जिसका कोई पागल या अपाहिज या किसी गंभीर बीमारी से पीडित कोई बच्चा हो , तो उसे बलि के लिए भेजा जाए , वह भी इनाम का हकदार होगा।
इनाम की राशि पर कोई ध्यान न देते हुए उसके बाद तो अभिभावक पागल और बीमार को अधिक छिपाकर रखना शुरू किया , ताकि राजा की दृष्टि न पड जाए और उसकी बलि न दे दी जाए। राजा परेशान चल ही रहा था कि चौथे वर्ष फिर बलि के लिए सपना आ गया। बलि के लिए किसी मनुष्य की खोज में राजा अनिश्चित दिशा की ओर चल पडे। इसके बाद कमर्शियल ब्रेक हुआ , और फिर एंकर की बातों से मालूम हुआ कि दरअसल बलि के बहाने भगवान की इच्छा तो राजा को एक सीख देने की थी। उत्सुकता और बढी , पर उसके बाद कहानी जैसे ही शुरू हुई , मेरे कालोनी की बिजली गायब । मेरी उत्सुकता बनी हुई है कि इससे आगे हुआ क्या ? आप पाठकों में से किसी ने इसे देखा हो , तो मेरी जिज्ञासा का समाधान करें कि बलि के बहाने आखिर राजा को क्या सीख मिली ?
इस कहानी के कारण कल से ही इस गंभीर विषय पर चिंतन चल रहा है कि जान कितनी प्यारी चीज होती है , अपनी भी और अपने परिवार वालों की भी , पर अपराधियों के लिए किसी की जान लेना कितना आसान होता है , गाजर मूली की तरह काट और भून डालते हैं लोगों को। वैसे तो प्रतिदिन मार काट की घटनाओं से अखबार और न्यूज चैनल अटे पडे रहते हैं , पर आज एक खास घटना की वजह से दिमाग बहुत तनाव में आ गया है। धनबाद से अपहरण किए गए एक बच्चे की हत्या किए जाने का समाचार सुनकर आज मेरा मन बहुत दुखी हो गया है। उसकी सूचना मुझे उसके स्कूल में पढनेवाले बहन के लडके से मिल रही है। मात्र 8 वर्ष की उम्र के इस बच्चे को अपराधियों ने किस बात की सजा दी , समझ में नहीं आता।
दस वर्ष पूर्व की एक घटना की याद पुन: मन को तकलीफ दे रही है , जब मेरे बडे बेटे के साथ पढनेवाले एक बच्चे का अपहरण उसी की कालोनी के अपराधी किस्म के कुछ बडे बच्चों ने किया था और आजतक उसका कुछ भी पता न चल पाया। अपराधियों को कोई सजा भी हो जाए , तो बच्चे तो अब लौट नहीं सकते । कैसे जी पाते होंगे उन बच्चों के माता पिता ? काश अपराधी उनके कष्टों को समझ पाते ?


