दो दिन से तबियत खराब थी
डाक्टर साहब ने दो दो गोली
सुबह शाम की दी थी
कल तक सब ठीक ठाक
सा ही जा रहा था
पता नहीं शाम होते ही
ऎसा महसूस हो रहा था
कि कोई जबर्दस्ती कुछ
पिलाये जा रहा था
गिलास भी कोई कहीं
नजर नहीं आ रहा था
मेरा तो जो हुवा सो हुवा
कंप्यूटर खोला तो वो तो मेरे
से ज्यादा पगला रहा था
"उल्लूक टाईम्स" के ब्लाग
के साथ साथ "नुक्कड़" को
पता नहीं क्यों दिखा रहा था
हो सकता हो मेरे कंप्यूटर
को भी कोई गोली खिला
कर चकरा रहा था ।
डाक्टर साहब ने दो दो गोली
सुबह शाम की दी थी
कल तक सब ठीक ठाक
सा ही जा रहा था
पता नहीं शाम होते ही
ऎसा महसूस हो रहा था
कि कोई जबर्दस्ती कुछ
पिलाये जा रहा था
गिलास भी कोई कहीं
नजर नहीं आ रहा था
मेरा तो जो हुवा सो हुवा
कंप्यूटर खोला तो वो तो मेरे
से ज्यादा पगला रहा था
"उल्लूक टाईम्स" के ब्लाग
के साथ साथ "नुक्कड़" को
पता नहीं क्यों दिखा रहा था
हो सकता हो मेरे कंप्यूटर
को भी कोई गोली खिला
कर चकरा रहा था ।



