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'वेब पत्रकारिता' को राजभाषा प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार : राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल श्याम माथुर को यह पुरस्कार प्रदान करेंगी


मुझे गर्व है अपने मित्रों पर

जयपुर। केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्याम माथुर को राजीव गाँधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना के तहत प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी पुस्तक ‘वेब पत्रकारिता’ के लिए दिया जाएगा। इस पुस्तक को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी ने प्रकाशित किया है।
श्‍याम माथुर से की गई बातचीत आप हिन्‍दी मीडिया पर औरसाहित्‍यशिल्‍पी पर पढ़ सकते हैं।
हिंदी दिवस (14 सितंबर) के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले एक समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल श्याम माथुर को यह पुरस्कार प्रदान करेंगी। उन्हें दस हजार रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार तकनीकी और विज्ञान की विभिन्न विधाओं से संबंधित विषयों पर उच्च स्तर के मौलिक हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए दिया जाता है। इससे पहले श्याम माथुर को उनकी पुस्तक ‘सिने पत्रकारिता’ के लिए दो वर्ष पूर्व भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार योजना में प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
जयपुर के संघर्षशील पत्रकारों में शामिल श्याम माथुर ने हाल ही ‘राजस्थान पत्रिका’ में समाचार संपादक का पद छोडक़र स्वतंत्र पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा है। अजमेर के दैनिक ‘न्याय’ से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्याम माथुर ने ‘नवभारत टाइम्स’ के जयपुर संस्करण में दस वर्ष तक उप संपादक के पद पर कार्य किया है। वे समाचार वाचक के तौर पर आकाशवाणी जयपुर से भी जुड़े रहे हैं और गेस्ट फेकल्टी के रूप में वे राजस्थान विश्वविद्यालय के जन संचार केंद्र में भी पत्रकारिता के विद्यार्थियों से नियमित संवाद करते हैं। फिल्म पत्रकारिता में उनकी विशेष दिलचस्पी है और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों को कवर किया है। अमिताभ बच्चन पर उनका मोनोग्राफ ‘अमिताभ तुझे सलाम’ बहुत चर्चित रहा है।

नुक्‍कड़ की बधाई।
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मीडिया के कल, आज और कल की पड़ताल - वेब पत्रकारिता पर पुस्‍तक प्रकाशित हो गई है


नब्बे के दशक की शुरुआत में यह कल्पना भी करना मुश्किल था कि आपका कंप्यूटर आपको सूचना और ज्ञान के अथाह भंडार तक पहुंचा सकता है। लेकिन आज इंटरनेट की उपयोगिता और इसके प्रभाव को लेकर दुनियाभर में अध्ययन किए जा रहे हैं और ज्यादातर मीडिया विशेषज्ञ इस बात को लेकर सहमत हैं कि नई सदी का यह माध्यम आम लोगों के जीवन में बदलाव की दिशा में एक प्रेरक की भूमिका अदा कर रहा है। जीवन के हर पहलू को छूने के साथ मीडिया जगत में भी ऑनलाइन जर्नलिज्म के रूप में यह एक नया आयाम साबित हुआ है। मीडिया जगत में इंटरनेट के साथ आए बदलाव और इसकी बुनियाद पर आने वाले कल की तस्वीर देखनी हो, तो इस दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो सकती है जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्याम माथुर की नई किताब- ‘वेब पत्रकारिता’।

वेब जर्नलिज्म जैसे जटिल विषय को लेखक ने साइबर स्पेस, वल्र्ड वाइड वेब, ब्लॉग, प्रिंट मीडिया और ऑनलाइन मीडिया का परिदृश्य, साइबर अपराध जैसे अध्यायों में बड़े ही दिलचस्प अंदाज में पेश किया है। वेब जर्नलिज्म पर गंभीर लेखन यदा-कदा ही पढऩे को मिलता है और हिंदी में तो ऐसी कोई कोशिश ही नहीं की गई है। इन अर्थों में कहा जा सकता है कि इस विषय पर हिंदी में यह पहली पुस्तक है। इस विषय पर अंग्रेजी में कुछ किताबें जरूर हैं, पर वे भी पश्चिमी परिदृश्य को आधार बनाकर लिखी गई हैं। लेकिन ‘वेब पत्रकारिता’ भारतीय संदर्भों की पृष्ठभूमि में पूरी गंभीरता और गहराई के साथ विषय की पड़ताल करती है।

किताब में कंप्यूटर के आविष्कार से लेकर इंटरनेट के लोकप्रिय होने तक की स्थितियों का दिलचस्प तरीके से वर्णन किया गया है। ‘वल्र्ड वाइड वेब’ शीर्षक वाले अध्याय में माइक्रोसॉफ्ट, नेटस्केप और दूसरी कंपनियों के आपसी संघर्ष को रोचक उद्धरणों के साथ दर्शाया गया है। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले शायद जानते होंगे कि सन् 1993 तक वेब को ना कोई जानता था और ना यह लोकप्रिय था। बस कंप्यूटर हैकर्स और वैज्ञानिकों के बीच ही इसकी पहचान थी। लेकिन सन् 1995 तक स्थिति बदल चुकी थी। सिलिकॉन वैली के कुछ इंजीनियरों की ताकत और करिश्माई हुनर की बदौलत इंटरनेट एक संपूर्ण व्यापार का रूप ले रहा था और इस टैक्नोलॉजी की तुलना टेलीविजन और प्रिंटिंग प्रेस से होने लगी थी। नेटस्केप का नंबर सबसे पहला था। इसके ब्राउजर लाखों लोगों के लिए वेब तक पहुंचने का प्रवेश द्वार बन गए थे। भविष्य काफी सुनहरा दिख रहा था। और आज हम देखते हैं कि इंटरनेट को लेकर लगाए गए तमाम अनुमान करीब-करीब सही साबित हुए हैं। किताब में इस पूरे परिदृश्य की विस्तार से चर्चा की गई है। ऑनलाइन जर्नलिज्म की संभावनाओं और सीमाओं के साथ वेब के लिए संपादन, लेआउट और डिजाइनिंग जैसे विषयों की भी गहराई से चर्चा की गई है। वर्तमान समय में जनसंचार के क्षेत्र में ब्लॉग की अहमियत को रेखांकित करते हुए लेखक ने ब्लॉग के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख किया है। इसी क्रम में वे लिखते हैं, ‘वर्ष 2003 से ब्लॉग्स के चलन में तेजी आई है और ईराक युद्ध के समय ब्लॉग्स मीडिया के सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरे। दरअसल, ईराक युद्ध कई मायने में पहला ‘ब्लॉग युद्ध’ था। पिछले खाड़ी युद्ध की तुलना में इस बार ईराकी ब्लॉगर्स ने ब्लॉग के जरिए पहली बार पूरी दुनिया तक अपनी आवाज पहुंचाई। सलाम पाक्स नाम के एक ब्लॉगर ने तो अपने ब्लॉग पर ईराक युद्ध पर आधारित पूरी किताब प्रकाशित की थी। यही नहीं इस दौरान ईराक युद्ध में शामिल सैनिकों ने भी अपने ब्लॉग बनाए।’

प्रिंट मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के परिदृश्य विषयक अध्याय में आधुनिक संचार-साधनों की भीड़ में भी परंपरागत पत्रकारिता (अखबार और पत्र-पत्रिका) का उज्ज्वल भविष्य देखते हुए लेखक लिखते हैं, ‘जैसे हर सुबह सूरज रोशनी और गर्मी लेकर आता है, वैसे ही अखबार सूचनाओं का भंडार लाकर मुझे देश, दुनिया, समाज और अक्सर खुद अपनी खबर से समृद्ध करता है। दैनिक अखबार की नश्वरता को जानते-बूझते भी मैं बिना अखबार के सुबह की चाय की कल्पना भी नहीं कर सकता।’

साइबर अपराध और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। देश के पहले हिंदी वेब पोर्टल ‘वेब दुनिया’ पर भी पर्याप्त सामग्री दी गई है और इस पोर्टल के कई अनछुए पहलुओं से वाकिफ करवाया है।

किताब में तकनीकी शब्दावली का इस्तेमाल बहुत कम किया गया है और इस तरह इसे आम पाठकों के लिए भी उपयोगी बनाने की सार्थक कोशिश की गई है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पिछले साल हिंदी सिनेमा पर आधारित अपनी पुस्तक ‘सिने पत्रकारिता’ के लिए भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार से सम्मानित लेखक श्याम माथुर ने वेब पत्रकारिता जैसे विषय को भी पूरी शिद्दत के साथ पेश किया है। किताब का प्रकाशन राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी ने किया है।

"वेब पत्रकारिता". इसे राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादेमी ने प्रकाशित किया है. 130 पेज की इस किताब की कीमत है सिर्फ 75 रुपये. डिस्काउंट काट कर करीब 55 या 60 रुपये में आम पाठक को मिल जायेगी.
जहाँ तक मेरी जानकारी है, हिंदी में इस विषय पर यह पहली पुस्तक है..

वेब पत्रकारिता
लेखक श्याम माथुर
पेज 130 सचित्र
कीमत 75 रुपये

प्रकाशक
राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी
प्लाट नंबर 1
झालाना इंस्टीट्यूशनल एरिया
जयपुर - 302004
फोन नंबर - 0141 - 2711129, 2710341
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मीडिया मंत्र जनवरी 2009 अंक में पढ़ें सिने पत्रकारिता की समीक्षा



श्री श्‍याम माथुर लिखित सिने पत्रकारिता पुस्‍तक को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा भारतेन्‍दु हरिश्‍चन्‍द्र पुरस्‍कार से माननीय सूचना एवं प्रसारण एवं विदेश राज्‍यमंत्री श्री आनंद शर्मा ने प्रथम पुरस्‍कार से पुरस्‍कृत किया है। इस पुस्‍तक की समीक्षा आप जनवरी 2009 के मीडिया मंत्र के अंक में पढ़ सकते हैं।
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श्‍याम माथुर को भारतेन्‍दु हरिशचन्‍द्र प्रथम ‍ पुरस्‍कार

The Ministry of Information and Broadcasting has announced the Bhartendu Harishchandra Awards for 2006. Shri Anand Sharma, the Minister of State for Information & Broadcasting will give away these awards on January 06, 2009 in New Delhi. Twelve books/manuscripts have been selected by the Jury this year for the awards.

Shri Shyam Mathur will receive the first prize in the "Journalism and Mass Communication" category for his manuscript "Film Patrakarita Ke Vividh Aayam" this time. Shri Harshdev has bagged the second prize for his book “Samayik Media Shabdkosh" and the third prize goes to Shri Sita Ram Khodawal for his manuscript "Hindi Jansanchar Aur Premchand Ka Jaagran Manch".

Shri Murli Manohar Manjul for his book "Akashvani ki Antarkatha", Shri Narendra Singh Yadav for his book "Graphic Design", Dr Smita Mishra and Dr Amar Nath 'Amar' for their jointly written book "Electronic Media : Badalte Aayam", Shri Prabhu Jhingran for his book "Sachitra Media Shabdawali" and Shri Dhananjai Chopra for his book "Sirf Samachar" have been awarded with consolation prizes.

The First prize is of Rs. 35000/-, Second prize of Rs. 25000/-, Third prize of Rs. 20000/- and consolation prizes of Rs. 5000/- each in this category.

In the 'Women Issues' category the First prize has been given to Ms. Anamika for her book "Man Manjhne Ki Zaroorat" and the Second prize goes to Ms Lata Sharma for her book "Aurat Apne Liye".

In 'Children's Literature' category the First prize goes to Shri Rama Shankar for his book "Antariksh Ka Swapnil Lok" and the Second prize goes to Shri Harish Kumar 'Amit' for his manuscript "Imandari Ka Swad". For these two categories, the first prize consists of Rs. 15000/- and the Second prize of Rs. 10000/- each. In the 'National Integration' Category, the Jury has not recommended any book or manuscript for awards.

Bhartendu Harishchandra Awards were instituted in 1983. Since then, these Awards are given by the Ministry of Information & Broadcasting every year to promote original writings in Hindi in the field of Journalism and Mass Communication. Awards for National Integration, Women Issues & Children's Literature were introduced in 1992.
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