आज राष्ट्रीय जागरण ने मेरे ब्लॉग व्यंग्य से मेरी पोस्ट बाए बाजू वालों का हश्र अपने ब्लॉग कॉलम फिर से में ली है, मैंने पाया है कि उन्होंने पोस्ट में अपनी मर्ज़ी से थोड़ा बहुत हेर—फेर किया है। मैं नुक्कड़ के माध्यम से इस प्रश्न को उठाना चाहता हूँ कि अखबार वाले हमारी पोस्टे बिना किया सूचना, जानकारी, अनुमति के छापतें हैं मानदेय भी नहीं देते हैं, तब उन्हें क्या मूल पोस्ट में ऐसा हेर फेर करना चाहिए ???????
राष्ट्रीय जागरण की यह गड़बड़ी जनसंदेश टाइम्स लखनऊ में प्रकाशित मूल लेख से मिलान कर पकड़ी जा सकती है। मैं अखबारों की इस प्रवृत्ति का घोर विरोध करता हूँ और आशा करता हूँ कि और ब्लॉगर्स व लेखक भी करेंगे।
प्रमोद ताम्बट
भोपाल
http://vyangya.blog.co.in/
http://www.vyangyalok.blogspot.com/
http://www.facebook.com/profile.php?id=1102162444
राष्ट्रीय जागरण की यह गड़बड़ी जनसंदेश टाइम्स लखनऊ में प्रकाशित मूल लेख से मिलान कर पकड़ी जा सकती है। मैं अखबारों की इस प्रवृत्ति का घोर विरोध करता हूँ और आशा करता हूँ कि और ब्लॉगर्स व लेखक भी करेंगे।प्रमोद ताम्बट
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