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इनसे अधिक मिठास कहीं और मिल सकती नहीं (अविनाश वाचस्‍पति)

त्‍योहार हैं आये सबके मन आनंद छाये मिले खूब बधाई
पर न तो मिठाई खाओ और न खिलवाओ मेरे प्‍यारे भाई

मिठाईयां बन रहीं, बिक रहीं, धड़ाधड़ खूब मिलावटी अब
बदले में मिल रही हैं सब बीमारियां सभी बेमिलावटी जी

खोया भी बन रहा नकली है जिसमें घी भी भरा नकली है
चीनी असली हो तो भी बचाव नहीं कर सकती मेरे मित्रो

लालच मन का इंसान के मन से बिल्‍कुल भी जाता नहीं है
इंसान के मन को हैवान बनाता लालच लजाता ही नहीं है

जाना सब छोड़ के है किसी को ले जाना कुछ भी तो नहीं
फिर भी कमाता है खूब उल्‍टे तरीकों से बेशर्म होकर वही

रोक इस पर लग सकती नहीं है जो गिर गया उठता नहीं
लालच के जंजाल में फंस गया है निकल सकता ही नहीं

दो दिल से शुभकामनायें सबको बोल चार मीठे बोलकर
इनसे अधिक मिठास कहीं और जहां में मिल सकती नहीं

इनमें हो मिलावट तो सबको महसूस तुरंत हो ही जाती है
शब्‍दों की मिलावट कई बार तो पकड़ में भी नहीं आती है

मिलावटी मिठाई से देख लो बेचकर मिलते नोट असली हैं
बाजार में दौड़ रहे जितने अब नोटों के ढेर भी तो नकली हैं

नकली है इंसान भी, इंसान है परेशान भी, उसने ठान ली
मिलावटी और नकली बेचने में बढ़ती है उसकी शान भी।
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