आजअतंरराष्ट्रीय महिला दिवस है । सबसे पहले सभी को शुभकामनाएं । मैं कुछ ज्यादा नहीं कहने और लिखने वाला नहीं हूँ । बस यही बात जेहन में है कि महिलाओं की दशा समाज में जो भी है क्या आज के ही दिन ज्यादा उबाल मारती है ? या फिर आज के मौके को भुनाना सभी को अच्छा लगता है ? कई पोस्ट आयी हैं अनके विषयों पर । मैंने पढी और अच्छा भी लगा । पर दुखद यह है कि यह सब हकीकत में हो रहा है । समाज में स्त्री की जो दशा है वह सभी जानते हैं । उच्च से निम्म स्तर तक की महिलाएं है उनकी अलग- अलग समस्याएं है । कितनी भारत की ऐसी महिलाएं हैं जो कि ये जानती हैं कि आज कौन सा दिवस है और इसका सही मायनों में क्या अर्थ है ?
आज इस दिवस के उपलक्ष्य में खूब सारे रंगारंग कार्यक्रम जरूर होगें इसके सिवा कुछ भी नहीं । हो सकता है कल ही भूल जायें फिर वही आम जिंदगी । बदलाव कुछ भी नहीं । ऐसे काम नहीं बनने वाला है । महिला दिवस हो या न हो पर जरूरी है कि महिलाओं की दशा और दिशा में कैसे सुधार हो वर्ना मेरे अनुसार इससे महिला उत्थान होने वाल नहीं सिवाय हो हल्ला के अलावा। इसलिए हाय हाय करने का आज कोई खास फायदा न होगा ।
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आज इस दिवस के उपलक्ष्य में खूब सारे रंगारंग कार्यक्रम जरूर होगें इसके सिवा कुछ भी नहीं । हो सकता है कल ही भूल जायें फिर वही आम जिंदगी । बदलाव कुछ भी नहीं । ऐसे काम नहीं बनने वाला है । महिला दिवस हो या न हो पर जरूरी है कि महिलाओं की दशा और दिशा में कैसे सुधार हो वर्ना मेरे अनुसार इससे महिला उत्थान होने वाल नहीं सिवाय हो हल्ला के अलावा। इसलिए हाय हाय करने का आज कोई खास फायदा न होगा ।



