
प्यार का खुमार फिजाओं में छाया है,
इन हवाओं ने गीत गुनगुनाया है ,
है महक तेरी बसंत में,
जैसे गुलाब ने भैरों को बुलाया है।
गगन के उडते पंछी ,
बाग में कोयल की कूंकें,
घास पर ओस की बूदें,
चांद की चांदनी में,
आम के बौंर की महक,
लहलहाते खेतों में,
सूरज की पहली किरण,
और
साथ तेरे टहलते हुए,
प्रकृति की छटा ,
का नूर तेरे नूर से ,
न जाने क्यों शर्माया है ।
क्या बंसत का खुमार ही,
हम दोनों पर उतर आया है ।
प्यार का खुमार..........फिजाओं में छाया है ।
इन हवाओं ने गीत गुनगुनाया है ,
है महक तेरी बसंत में,
जैसे गुलाब ने भैरों को बुलाया है।
गगन के उडते पंछी ,
बाग में कोयल की कूंकें,
घास पर ओस की बूदें,
चांद की चांदनी में,
आम के बौंर की महक,
लहलहाते खेतों में,
सूरज की पहली किरण,
और
साथ तेरे टहलते हुए,
प्रकृति की छटा ,
का नूर तेरे नूर से ,
न जाने क्यों शर्माया है ।
क्या बंसत का खुमार ही,
हम दोनों पर उतर आया है ।
प्यार का खुमार..........फिजाओं में छाया है ।


