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पहचानने का करते हैं प्रयास, चाहे न हो कोई बिल्‍कुल खास

क्‍या सिर्फ कविता की व्‍याख्‍या की जा सकती है
मुझे तो ऐसा नहीं लगता है
और कहा भी गया है
एक चित्र दस शब्‍द हजार शब्‍दों से अधिक
स्‍वरों को मुखर करता है
तो कहिए खरी खरी
सामने बिठाकर बैठ जाइए दरी
देखिए भांपिए, अपनी निगाहों से आंकिए
और शब्‍दों में ढालिए कि इसमें ढाल नहीं है
तलवार यह दोधारी है
इसमें दूसरी ओर कलम निकाली है
अब कहने-लिखने की आपकी बारी है।
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पहचानेंगे पहचानिये पहचान लिया


क्या बता सकते हैं आप
हैं हम कौन, कहां हैं
कब हैं, क्यूं हैं साथ ?

आप अगर वहां रहे होंगे
तो अवश्य पहचान लेंगे
ऐसी पहचान कुछ दिनों
तक
कुछ दिनों बाद आपसे
करवायेंगे
इस प्रक्रिया से आपको
और हमें सब जान जायेंगे.
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