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गोवा में हिंदी चिट्ठे की खोज



जिक्र है इसमें
डॉ. सुभाष राय का
साखी का
ब्‍लॉगवाणी का
चिट्ठाचर्चा का
वर्धा सम्‍मेलन का
नुक्‍कड़ का
ममता श्रीवास्‍तव का
और वंदना अवस्‍थी दुबे का
स्‍नैपशाट में लेख के ऊपर
चित्र आपका भी है
पहचान लीजिए
अपना न सही
अन्‍य चिट्ठाकार मित्र का ही सही।
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अविनाश वाचस्‍पति गोवा से दिल्‍ली आ पहुंचे हैं और साथ लाये हैं खूब सारी सुनहरी स्‍मृतियां


आप जानते होंगे और आपने
शनिवार को गोवा में हुआ हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन, अब रविवार को रोहतक में होगा हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन
यह पोस्‍ट भी पढ़ी होगी
। अब इस पोस्‍ट को भी पढ़ लीजिए। अविनाश जी गोवा से अकेले नहीं आए हैं। शनिवार को आये हैं शुक्रिया साथ लाये हैं
।

अविनाश जी के हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के विकास के लिए जो कर रहे हैं, वो नि:संदेह अद्भुत है। समर्पण भाव देखते ही बनता है। आप भी देखिए।

यहां पर क्लिक कीजिए।
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शनिवार को गोवा में हुआ हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन, अब रविवार को रोहतक में होगा हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन

http://www.blogger.com/profile/09223313612717175832
20 नवम्‍बर 2010 की दोपहर बाद समय 3 बजे के आसपास। फोन की घंटी बजती है। देखता हूं इस्‍मत जैदी का फोन है। संयोग अभी-अभी उनके ब्‍लॉगों का सरसरी तौर पर दौरा करके लौटा हूं। इस्‍मत जैदी जी को पहली बार गोवा आने पर रश्मि रवीजा जी के ब्‍लॉग अपनी उनकी सबकी बातें पर पढ़ा। उनके बचपन के किस्‍से पढ़ने पर मालूम हुआ कि वे आजकल गोवा में पणजी में हैं और आप परिचित ही हैं कि मैं भी गोवा आया हुआ हूं।
जब किस्‍सा पढ़ रहा था तो सोच रहा था कि इस बार गोवा यात्रा की उपलब्धि में अवश्‍य ही हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से अवश्‍य मुलाकात होगी। यह सोचकर जब इस्‍मत जी के प्रोफाइल पर पहुंचा तो वहां न तो ई मेल पता मिला और न कोई फोन नंबर ही। तुरंत रश्मि जी की पोस्‍ट पर कमेंट में लिख डाला अपना गोवा का नंबर, उनसे संपर्क करने का आग्रह करते हुए अपना गोवा का नंबर टिप्‍पणी बॉक्‍स में लिख दिया।
फिर इस्‍मत जी के ब्‍लॉग पर ईद संबंधी पोस्‍ट में पहुंचकर मुबारकबाद देते हुए अपना नंबर छोड़ दिया और अगले ही दिन सुबह 9 बजे इस्‍मत जैदी जी से फोन पर बात हो गई। मालूम हुआ कि वे एक वर्ष से ब्‍लॉग लिख रही हैं और कभी-कभी ब्‍लॉग पोस्‍टों पर मेरी टिप्‍पणियों से मिलती रही हैं। तय हुआ कि जल्‍दी ही किसी दिन मुलाकात होगी। उनका आवास मीरामार समुद्र तट के आसपास ही है, दूरी अधिक नहीं है।
दो-तीन दिन यूं कार्यालय व्‍यस्‍तता में ही बीत गए हैं। आज जब एकाएक फोन आया तो सोचा कि आज ही मिल लेते हैं। तुरंत ही उनसे फोन पर पता लिया और लगभग आधे-पौने घंटे में मैं उनके घर पर मौजूद था। रास्‍ता वैसे तो 10 से 15 मिनट की दूरी का है परंतु पूछकर पहुंचने में समय तो लगता ही है। पूछ कर भी जब कामयाबी नहीं मिली तो उन्‍होंने अपने बेटे मुशीर को एक तय प्‍वाइंट पर साईकिल पर मुझे लेने भेज दिया और भटकन समाप्‍त हुई। बेटी के बारे में भी कुछ बतलाया है पर मुझे याद नहीं रहा है। बातें तो खूब हुई हैं पर जो याद रह पाई हैं, लिख दी हैं जो भूल गया हूं, उन्‍हें इस्‍मत जैदी जी अवश्‍य लिखेंगी। ऐसा मेरा विश्‍वास है और आग्रह भी है।
मैं पांचवीं मंजिल पर इस्‍मत जैदी जी के निवास पर पहुंच गया। आपस में नमस्‍कार के बाद पाया कि सहजता और सौम्‍यता की प्रतिमूर्ति हैं इस्‍मत जी। मैंने पूछा गोवा में कब से हैं, तो बतलाया कि नौ साल से। पति की ट्रांसफर पर आना हुआ था। लिखना कब शुरू किया, वे बतला रही हैं कि दो वर्ष पहले। एक परिजन के निधन पर एक शेर लिखा गया और उसके बाद से लेखन का सिलसिला चल निकला है। ब्‍लॉग जगत में प्रवेश के बारे में बतलाती हैं कि कंप्‍यूटर से कोई परिचय नहीं था । वंदना जी बचपन की मित्र हैं, वे पीछे पड़ी रहीं और फिर ब्‍लॉग खुद ही बनाकर दे दिया कि अब इसे चलाओ और तब से चला रही हूं।
कंप्‍यूटर भी सीख लिया है। बारहा में टाइप करती हूं। पर कहीं कहीं कठिनाई होती है। मैंने उन्‍हें हिन्‍दी टूल किट की जानकारी दी और कहा कि इसका लिंक उनकी ई मेल पर भेज दूंगा। पर अभी तक उनका ई मेल पता मेरे पास नहीं पहुंचा है। अपना ई मेल पता उनके पास छोड़ दिया है। उनकी मेल आते ही नुक्‍कड़ की यह पोस्‍ट उनको प्रेषित कर दूंगा, जिसके माध्‍यम से बहुत सारे हिन्‍दी ब्‍लॉगर हिन्‍दी में सहज रूप से लिख पा रहे हैं।
वंदना जी का नंबर मिलाता हूं पर बिजी बतला रहा है। खैर ... कार्यालय पहुंचकर मिलाया, मिल गया है और वे थोड़ी सी कोशिश के बाद बतला देती हैं कि अविनाश जी बोल रहे हैं। मैं स्‍वीकार लेता हूं। वे विजयी हुई हैं पर असलियत में यह विजय हिन्‍दी की है, हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की है।
खूब सारी बातें हुईं। घर परिवार की। लगभग एक घंटा कब बीत गया मालूम ही नहीं चला। इस बीच उन्‍होंने शीतल पेय भी पिला दिया है और ईद के अवसर पर मीठी सेंवई दो प्रकार की, सूखे मेवे जिनमें काजू, किशमिश, बादाम इत्‍यादि और नमकीन भी। मैंने बतलाया कि डायबिटीज से ग्रसित हूं परंतु सेंवई खाऊंगा अवश्‍य और अधिक नहीं परंतु खाता हूं और सेंवईयों की मिठास मन में रच गई है। अभी अभी यह पोस्‍ट पढ़ी है सरसरी तौर पर, जीवन की मिठास यही है।
वर्धा सम्‍मेलन,आचार संहिता, ब्‍लॉगर विवाद, बदनाम होंगे तो क्‍या नाम न होगा की प्र‍वृत्ति, सतीश सक्‍सेना, अनूप शुक्‍ल, चिट्ठा चर्चा, ब्‍लॉगवाणी के संबंध में भी काफी उपयोगी चर्चा हुई। डॉ. सुभाष राय के ब्‍लॉग बात बेबात और साखी का जिक्र और सुभाष जी के आगरा के निवास पर चोरी के संबंध में भी तथा उनके महाव्‍यस्‍त होने के कारण ब्‍लॉग पर काफी दिनों से कुछ न लिखे जाने के संबंध में भी।
वे चाय या काफी का आग्रह कर रही हैं। इच्‍छा तो मेरी भी है परंतु थोड़ी ना-नुकर करता हूं। फिर मान जाता हूं। चाय पिऊंगा लेकिन बेचीनी की, वे पूछती हैं कि शुगर फ्री। मैं मना कर देता हूं। चाय के फीकेपन में भी मन को अच्‍छे लगने वाले मीठेपन का अहसास होता है अब इसलिए। इसी बीच उन्‍हें याद आता है कि वाहन से आया हूं, उसका ड्राइवर भी तो होगा नीचे और वे सेंवई और शीतल पेय उसके लिए अपने बेटे मुशीर के हाथों भिजवाती हैं।

चाय पीता हूं। अब चलना चाहता हूं। आफिस से निकले काफी समय हो गया है। वे इजाजत दे देती हैं। पर कल रविवार के दिन मिलने का तय किया है। फोन करके मिलेंगी, उनके पतिदेव की छुट्टी है, उनसे भी मिलना चाहता हूं। इस्‍मत जी ने बतलाया है कि उनके लेखन में उनके पतिदेव का प्रोत्‍साहन है। वे न प्रोत्‍साहित करते तो वे न लिख पा रही होतीं। हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत उनके पतिदेव का भी आभारी है और वंदना अवस्‍थी दुबे का तो है ही। जिन्‍होंने ब्‍लॉग बनाकर दे दिया और वे इसे गति दे रही हैं। इस गति की प्रगति में अब आप भी साझीदार बन रहे हैं। जो लिंक दिए हैं, उन्‍हें खोलकर भी पढिएगा। मैं जानता हूं कि मेरे से पहले मेरे बहुत से ब्‍लॉगर लेखक-पाठक उनसे परिचित हैं।
चर्चा होती है कि गोवा में और कोई हिन्‍दी ब्‍लॉगर नहीं है। मैं बतलाता हूं कि ऐसी बात नहीं है, दो वर्ष पहले ममता श्रीवास्‍तव जी से मुलाकात हुई थी, ऐसे ही अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के अवसर पर। जिनका ब्‍लॉग ममता टीवी के नाम से प्रख्‍यात है। पर वे अपरिचित हैं। अब वे अरूणांचल जा चुकी हैं। मेरी खोज जारी है, ऐसा नहीं हो सकता, मेरा मन नहीं मानता कि गोवा में और हिन्‍दी ब्‍लॉग न हों। जरूर होंगे बस मैं अभी उन तक नहीं पहुंच सका हूं। परंतु मेरी खोज जारी है कोलम्‍बस की तरह। अभी जो मिला है, वो तो शुरूआत है, अभी अवश्‍य ही कुछ और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से अवश्‍य मुलाकात का विश्‍वास है। 4 दिसम्‍बर 2010 को गोवा से वापसी है। आप मेरी मदद कीजिए कुछ और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को गोवा से ढूंढ निकालने में, जिससे एक और हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन गोवा की धरती पर संपन्‍न हो सके। आमीन।

रोहतक में राज भाटिया जी और अन्‍तरसोहिल जी द्वारा आयोजित होने वाले इंटरनेशनल हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन की सफलता के लिए नुक्‍कड़ परिवार की ढेरों शुभकामनाएं।


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आज का दिन : पहेली सुलझाएं या खुद ही उलझ जाएं : अविनाश वाचस्‍पति गोवा में हैं

19 नवम्‍बर है आज
बतलायें क्‍या है बात खास
किसी को याद भी है
या आभास भी है

वे गोवा में हैं
पिछले वर्ष भी वहीं थे
गोवा में हो रहा है
अंतरराष्‍ट्रीय भारतीय फिल्‍म समारोह।

वे गायब हैं
अपने ब्‍लॉग से
फेसबुक से
ट्विटर से
नुक्‍कड़ से
टिप्‍पणियों से भी
कभी कभी ही
कहीं कहीं देते हैं दिखलाई।

गोवा का है उनका नंबर
09420920422
आज उन्‍हें चैन न लेने दें
पर पहले इस पहेली को तो बूझ लें।

आज जन्‍मदिन राजीव गांधी का है
श्री श्‍याम बेनेगल का है
हैं तो जन्‍मदिन और भी
और सालगिरह भी हैं नेक।
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गोवा की राजधानी पंजिम में हूं मैं : अविनाश वाचस्‍पति

मैं अब फिर से एक बार गोवा में हूं
राजधानी पंजिम में
और 4 दिसम्‍बर 2008 तक रहूंगा
मेरा यहां का मोबाइल नंबर
9421748081 है।

गोवा शहर के हिन्‍दी लेखकों
और ब्‍लॉगरों से अनुरोध है
कि संपर्क करें ताकि हो सके
मुलाकात, बातचीत और
ब्‍लॉगर मीट।

ई मेल पता avinashvachaspati@gmail.com

प्रतीक्षा में।
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गोवा जोगर्स पार्क में खंबे को थामे एक तार अड़ा है


गोवा शहर के ब्लागर
पढ़ने वाले
जानने वाले
लिखने वाले
मेरे इस अनुरोध
पर दें ध्यान.

समस्या उनकी है
एरिया वी आई पी है
जोगर्स पार्क में
टहलने और पैदल
चलने वाले ट्रैक पर
एक बिजली के लोहे
के खंबे को थामे
एक तार अड़ा है
लगता है खड़ा है
कोई टकराए
गिर जाए
या खंबे से सिर
फूट जाए
फिर चाहे
गिर जाए या
लुढ़क जाए ?

चलो उसे बचाएं
इस खंबे और तार
को हटाने में
मेरी मानें तो
सभी गोवा वासी
जुट जाएं .

है कोई मेरे साथ .......
मैं आजकल गोवा में हूं।
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गोवा

नुक्कड़ आजकल गोवा में सक्रिय है
रपट बाद में मिलेगी
यहां के मौसम की
बे मौसम की भी
चित्र भी और विचित्र भी
इंतजार करें
फल मिलेगा
पर कड़वा है या मीठा
फैसला आपका सर्वोपरि ?
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