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कोई दीवाना कहता है फेम कुमार विश्‍वास कल से आपको आपके शहर में मिलेंगे आप उनसे मिलना मत भूलिएगा उनके स्‍वर पाठ के झूले में झूलिएगा (अविनाश वाचस्‍पति)


कोई दीवाना कहता है
से प्रख्‍यात डॉक्‍टर कवि कुमार विश्वास अब कल से अपने काव्य पाठ से विदेशी धरती को अपनी कविता डॉक्‍टरी के स्‍वर पाठ से आलोकित करेंगे । कुमार 29 अप्रैल से 30 मई तक यूएसए तथा कनाडा के दौरे पर रहेंगे । जहां वे अपने तय कार्यक्रम के तहत अलग - अलग जगहों पर काव्य पाठ करेंगे ।
कार्यक्रम के अनुसार न्यू जर्सी में आयोजित हिन्दी महोत्सव में एक व दो मई , बुफ़ैलो में सात मई , कनाडा [ मोन्ट्रियल व टोरंटो ] में 8-9 मई , वाशिंगटन डीसी में 15 मई , अटलांटा में 16 मई , सेन फ्रांसिस्को में 22 मई , लॉस एंजिलिस में 23 मई , कनैक्टिकट में 29 मई को विदेशी श्रोता कुमार के काव्य पाठ का भरपूर लुत्फ उठाएंगे ।
अगर आप वहां है
जहां वे आ रहे हैं
उड़नतश्‍तरी वाले देश में
अदा जी के हां नहीं तो में
वे आपके देश में आ रहे हैं
और आप उनकी खबर पा रहे हैं
तो यहां पर अपनी राय अवश्‍य दें
उनकी एफआईआर नुक्‍कड़ पर दर्ज करें
इससे हमें पता लगता रहेगा
वे कहां पर किसको दीवाना बना रहे हैं

कविता का मस्‍ताना समां महका रहे हैं
जहां जहां रहते हैं नुक्‍कड़वासी
वहां पर विश्‍वास भी मौजूद मिलेंगे

यह मैं नहीं कह रहा हूं
कोई दीवाना कहता है
दीवाना वही तो सबके
दिलों में रहता है
आप तो सुन ही रहे होंगे
दीवाने की आवाज
हम मन में सुन रहे हैं
मन की ताकत सबसे बड़ी
विश्‍वास की चल रही है
आज इंटरनेटीय घड़ी।
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कुमार विश्‍वास दीवानों से मिलेंगे प्रगति मैदान विश्‍व पुस्‍तक मेले में डायमंड बुक्‍स के स्‍टाल पर



कोई दीवाना कहता है
डॉ. कुमार विश्‍वास कविता कहते हैं
पर 6 और 7 फरवरी 2009 को
उनका कविता से अवकाश
दोपहर 1 से सांय 4 बजे तक रहेगा
विश्‍वास का यह दरिया
विश्‍व पुस्‍तक मेला परिसर में बहेगा
इसमें डुबकी मारने का स्‍वर्णिम अवसर
मत गंवायें और
मेले में पहुंच जायें


कोई दीवाना कहता है
के नवीन संस्‍करण में
आपको मिलेंगे प्रख्‍यात पेंटर
इमरोज साहिब के बनाये
स्‍कैचिस (हिन्‍दी में क्‍या रेखाचित्र कहेंगे
या कहेंगे कुछ और)
पर पुस्‍तक मेले में पहुंचकर
न जायें बेदेखे हुजूर
विश्‍वास भी मिलेंगे
कुमार भी मिलेंगे
और मिलेंगे दीवाने
खूब सारे।

पूरे मेले में कहां तलाशेंगे
डायमंड बुक्‍स हाल नंबर 12 ए
और स्‍टाल नंबर पौने दो सौ
यानी 175
पर हीरे बंटेंगे
पुस्‍तक तब हीरा हो जाती है
जब उस पुस्‍तक पर
रचनाकार के हस्‍ताक्षर छप जाते हैं

तो पाठक के मन में
कई स्‍‍वर्णिम अध्‍याय जुड़ जाते हैं
वही तो संस्‍मरण कहलाते हैं

तो मौका मत चूकें
mail2drkv@gmail.com
इस पर मेल करेंगे तो
विश्‍वास कीजिए कुमार जी
आपको खुद ही ढूंढ लेंगे
वैसे मैं भी आपको
वहीं कहीं मिलूंगा।
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