कटहल – कटहलनी की प्रेमकहानी

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  • एक कटहल अपनी कटहलनी के साथ अपने-अपने  को छोड़कर वीआईपी इलाके में रात के रोमांस की मस्तियां देखने के लिए पेड़ से उतरकर बंगले के बाहर टहलने चले गए। कटहल लटक कर लंबे नहीं हो पाए थे तो उनके मन में विचार आया कि टहल कर अपनी लंबाई बढ़ा लें। अच्‍छे दिन लाने का वायदा करके सरकार बनाने वालों के एक रसूखदार विधायक को वहां रहने का मौका मिल गया। सरकारी आवास में एन्‍ट्री मारते हुए उन्‍होंने सब कुछ गिन लिया। लंबे अरसे से पेड़ पर टंगे कटहल और कटहलनी उसकी यादों में बस गए। जबकि वहां नौ और थे। उसने यह भी याद रखा कि वह गिनती में ग्‍यारह थे जबकि पौ भी कम से कम बारह होती है। सरकारी आवास में एन्‍ट्री मारते हुए विधायक ने सब कुछ गिन लिया।  लंबे अरसे से टंगे कटहल दम्‍पत्ति और एक  युवा कटहलनी याद रह गए। उन कटहलों की हैसियत उस विधायक के आवास पर रहने की कतई न थी। पर लगता है युवा चुलबुली कटहलनी पर विधायक जी की नीयत खराब हो गई। वह ग्‍यारह में से दो घटकर नौ क्‍या हुए, विधायक जी की त्‍यौरियां चढ़ गईं। नौ में दो बढ़कर ग्‍यारह हो जाते तो तनिक शोर न मचता। फिर तो विधायक और उनके आवासीय कर्मचारियों की पार्टी तो बनती है जी का डांस चल रहा होता। जिसमें देशी कम विदेशी अधिक की तर्ज पर जाम पर जाम सबके हलकों से सूखे की स्थितियों से निजात दिला रहे होते। अपनी इन सब मुरादों को पलीता लगते देखकर उन्‍होंने तत्‍क्षण अपने मुरादाबाद दौरे को तत्‍काल प्रभाव से रद्द करने के आदेश जारी कर दिए। जब मुराद पूरी होने की सभी संभावनाओं को सांप सूघकर चला गया तो वह भी सांप के सान्निध्‍य में रहकर क्‍यों जोखिम उठाते।  उन्‍होंने तुरंत रात के दूसरे पहर में ही पुलिस कन्‍ट्रोल रूम के सौ नंबर पर अपनी सोने की इच्‍छा त्‍यागकर फोन कर दिया। आनन-फानन में पुलिस की गाडि़यों की कतार लग गई। यह वही पुलिस वाली गाडि़यां थीं जो शहर में दुष्‍कर्म होने पर, डकैती की सूचना इत्‍यादि मिलने पर देरी से पहुंचने के लिए बहुत धूम मचा चुकी थीं।
    पुलिस के तंत्र ने मंत्र मारकर सरकार या विधायक की गुड बुक में आने के लिए आवास में मौजूद सबको एकत्र किया और उनकी रसोईयों में कटहलों की बरामदगी के लिए बिना वारंट ही घुस गई। पर कटहल वहां कच्‍चा या पका हो तो उनके चिन्‍ह मिलें। शोरगुल सुनकर पड़ोसी भी आ गए पर उनकी रसोईयों में जांच शुरू करने के लिए पुलिस के पास आवश्‍यक वारंट नहीं थे।
    उधर यहां के हालात से एकदम बेखबर कटहल और कटहलनी गल और कमरबहियां डाले एकदम दिगम्‍बर अवस्‍था में शहर की रंगीन चकाचौंध से अभिभूत हुए जा रहे थे और पछताते हुए बतिया भी रहे थे कि उन्‍होंने अपनी जिंदगी के कितने ही बरस यूं ही होम कर डाले हैं। आखिर पेड़ उनका होम ही तो है। पर आज वह बेहद खुश थे क्‍योंकि आधुनिक जीवन शैली के रंग-ढंग देखकर उनकी आंखों के डोरे गुलाबी हो गए थे।
    उन्‍हें मालूम नहीं था कि कटहल के हल कटने के कारण देश भर में किसान रोजाना आत्‍महत्‍या करके बने हुए रिकार्ड तोड़ रहे थे। हल कटा या नहीं, इसकी खबर किसी टीवी चैनल पर दिखाई नहीं गई थी जबकि  किसानों की आत्‍महत्‍या पर राजनीतिक सौदेबाजी करते  नेता जरूर बयान देते दिखाई देते रहते थे। कोई भी नेता कम कहकर कट मारकर अपने को अज्ञानवान साबित नहीं करना चाहता था। सब अपने-अपने तरीके से बेहतर नतीजों की खोज में जुटे थे। उनकी इस अदा से नेता, नेता कम बाजीगर अधिक लगते थे।
    इधर कटहल के सुर्खियों में छाने के कारण अन्‍य सब्जियों में डाह उत्‍पन्‍न हो गई। वह कटहलों की किस्‍मत को देखकर ईर्ष्‍या की आंच में झुलस गई थीं। यूं तो इन दिनों रेल किराए और माल भाड़े में आई महंगाई के कारण अपने रेट बढ़ने से सब्जियां आपस में मिलकर खुशी का उत्‍सव सेलीब्रेट कर रही थीं। पर कटहल की संचार मीडिया में पहली धमाकेदार  मौजूदगी से सब हैरान थीं। यह सारा श्रेय नई सरकार को गया, जिसके आने से कटहल के अच्‍छे दिन आए थे।
    जबकि यह कटु सत्‍य है कि किस्‍मत से अधिक और समय से पहले कभी किसी को नहीं मिलता है। वहां ईश्‍वर की मर्जी चलती तो भ्रष्‍टाचार वहीं से शुरू हो गया होता।  खैर ...
    युवा कब किसे सिर पर चढ़ा लें और कब एक झटके में गिरा दें, कोई नहीं जानता। तभी सीएम बने हैं पीएम और आम आदमी सीएम। पर सीएम बनने से अधिक, सीएम बने रहना अधिक दिक्‍कत वाला काम है। यहां खालिस ईमानदारी नए सीएम को ले डूबी। युवाओं को भ्रमित करने में सामने वाले कामयाब रहे।
    वापसी पर बाहर का यह सीन देखकर प्रेमियों को कुछ समझ नहीं आया पर सारा माजरा जानने के बाद वह सामने वाले पड़ोसी के नारियल के पेड़ पर जाकर उल्‍टे लटक गए और वहीं से इस नाटक के मुख्‍य पात्र (बरतन) बनकर, इन सब्जियों ने खूब ख्‍याति लूटी और अभी तक लूटकार्य में जुटे हुए हैं। ताजा खबर के अनुसार इन सब्जियों के यूं गायब होने पर सीबीआई जांच बिठा दी गई है।

                                    -    अविनाश वाचस्‍पति

    2 टिप्‍पणियां:

    1. अच्छी है अब पुलिस के पास नेताओं के सरकारी बंगले में लगे कटहल , या मंत्री महोदय की चुराईं गयी भेंसों को ही ढूंढने काम रह गया है। कहानी के नायक नायिका ने भी अपनी मस्ती के लिए जबरन ही पुलिस की कवायद करवा दी है चलो हमें भी रिपोर्ट का इंतज़ार है. देखें क्या होता है

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