शारीरिक संबंधों की रिले है लिव इन रिलेशनशिप : बॉलीवुड सिने रिपोर्टर 4 दिसम्‍बर 2013 के अंक में प्रकाशित


सिनेमा में यह मामला सदा सुर्खियों में गरमागर्म रहता है। पर यह अपने शीतल रूप में समाज में सदा से कायम है। लिव इन रिलेशनशिप के मायने संबंधों के उन दायरों में रहना जहां पर सब लागू हो परंतु फिर भी बेकाबू हो। ऐसा दौर जोखिमभरा है या इसमें सिर्फ हरा-हरा है। सबके मन में इसे लेकर सब कुछ फहरा रहा है, जिससे जानबूझकर भी इंसान बहरा ही बना रहना चाहता है। इस बहरेपन के कई लाभ हैं। इससे सब ओर हरियाली दिखलाई देती है। इस हरियाली पर हर कोई सुकून का सुखद अहसास करने को तैयार बैठा है।

पानी के जहाज पर टिकना, पर टिके होकर भी डगमगाना और सदा डगमगाते रहना जैसे पी रखी हो और संबंधों के महासागर में नशेमन हो हिलोंरे आ जा रही हों। हवा में उड़ता नहीं है, धरती पर ही दिखलाई देता है जबकि पानी पर डोलायमान रहता है यह पानी का जहाज शिप है न। पानी के जहाज में साथ रहना सरल नहीं है। हर समय स्थिति डांवाडोल रहती है। पानी का डोलना तो सदा सुहाता है परन्तु रिश्तों का डोलना संबंधों के सभी बंध खोलकर रख देता है। जिन्हें खोलने की ख्वाहिश भी न हो, उन ख्वाहिशों का भी दम निकल जाता है।

संबंधों के बीच की ऐसी रिले जो कभी भी टूट सकती है, यूज होने के बाद फ्यूज हो सकती है । ऐसी कोई रिले आज तक नहीं बनी जिससे सदा समन्वयता तक तारतम्यता बनी रहे। रिले वो जो साथ ले चले, डोलती तो रहे पर खौलने की नौबत न आए। खौलने की नौबत आते ही सब कुछ खुल जाता है और फिर रीत जाता है। रीतते हुए भी सब बीता हुआ याद आता है। बीता हुआ सुख कम दुख अधिक देता है। बीतने वाली यह रीत किसी भी भीत का आड़ लेकर सामने आने से, रीतने से, चुकने से रूक नहीं पाती है। चुकने के लिए चूक से बचने की कवायद जोर पकड़ रही है बल्कि जोर की डोर कस कर थामी जाती है। यह डोर अंग्रेजी के दरवाजे को पकड़ता नहीं है यह तो लिंक है उस डोर का जो रस्सी है - रस्सी जो अंधेरे में सांप बन जाती है और सांप जहर का पर्याय है, गरल ही स्मरण आते हैं विषाद बन जाते हैं। सिनेमा में इनके मनमोहक रूप ही दिखाई देते हैं।
 
सांप का जहर के साथ लिव इन रिलेशनशिप है जो सिर्फ किसी को काटे जाने पर ही भंग होता है और काटने पर रीतते हुए भी रीतता नहीं है। रीतने के बाद भी जहर का भय इंसान के मन से नहीं निकल पाता है। जिन्होंने सांप के काटने को देखा है, वे यह भी जानते हैं कि जब सांप दांत गड़ाता है जो जहर को इंजेक्ट करता है और सब खाली कर देता है पर भय खाली होने के बजाय और भर जाता है। यह भरना भय की संबंधों की न टूटने वाली रिले या लय है। यदि यही लय साथ रहने के संबंधों में बनी रहे तो फिर काहे की शिकायत - कोई शिकायत करेगा भी नहीं। डर नहीं लगेगा तो सांप को मारने का प्रयास न तो किया जाएगा और न ही सांप कभी मारा ही जाएगा। सांप जब काट रहा होता है, तो देखने वाले को सांप द्वारा खुद को भी काटने के अहसास की आ रही फुरफुरी शरीर का रोम-रोम हिला देती है। यही संबंधों का लिव इन रिलेशन है जो पानी में शिप की तरह तैरता रहता है।
बकाया अगले अंक में ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. लिव-इन रिलेशन ले बना, मना रे-मना मौज |
    लड्डू की अब फ़िक्र क्या, खा बादामी *लौज |

    खा बादामी लौज, तरुण धोखा मत खाना |
    रविकर कहता नौज, नहीं मुँह कभी फुलाना |

    बने रेप का केस, अगर आपस में टेंशन |
    देखे भारत देश, चट-पटा लिव-इन रिलेशन ||

    लौज =मिठाई
    नौज=ईश्वर न करे

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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