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  • नरेन्द्र व्यास
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  • हमारे प्रिय व्यंग्यकार श्री अविनाश वाचस्पति जी का प्रतिष्ठित पत्रिका 'शुक्रवार' के 23 अगस्त, 2012 के अंक में प्रकाशित व्यंग्य-




     



    4 टिप्‍पणियां:

    1. बधाई हो..। तारीख भी लिख दिये होते तो अच्छा होता।

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    2. शुक्रिया देवेन्द्र जी. अच्छा याद दिलाया आपने. एडिट कर दिया है.

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    3. जी हाँ मान ली
      आपकी बात
      कुछ आपके जैसे
      कुछ हमारे जैसे
      होते हैं सांसद
      बाकी जो बचे होते हैं
      उनके लिये जो क्या
      आप कुछ कहते हैं
      जय हो !

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    4. वाह, रंग जमा दिया अविनाश भाई ने!!!

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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