मौत को अब तू मनाना सीख ले - अविनाश वाचस्‍पति

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  • मौत को अब तू मनाना सीख ले
    बुलाए मौत तुरंत जाना सीख ले

    मैं तैयार हूं
    आ मौत, कर मेरा सामना
    मैं नहीं करूंगा तुझे मना
    डर कर नहीं लूंगा नाम तेरा
    जानता हूं, मारना ही है काम तेरा
    डराना भी तूने अब सीख लिया है
    डरना नहीं है, जान ले, काम मेरा
    आए लेने तो करियो मौत
    पहले तू सलाम
    कबूल करूंगा सलाम तेरा नहीं डरूंगा
    भय की भीत पर मैं नहीं चढूंगा

    कर लिया है तय
    डर कर मैं एक बार भी नहीं मरूंगा
    मारना चाहेगी तू मुझे मैं तब भी नहीं डरूंगा
    मरूंगा, तैयार हूं मरने को
    लेकिन जी हुजूरी
    कभी नहीं करूंगा
    न मौत की
    न बीमारी की
    न सुखों को काटने वाली आरी की
    दुखों से करूंगा प्‍यार मैं, यारी करूंगा
    लेकिन उधार लेकर नहीं मरूंगा
    नियम यह मैंने तय किए हैं
    तुझे न हों पसंद
    नहीं पड़ता अंतर
    जीवंतता से जीने का
    यही है मेरा कारगर मंतर।

    18 टिप्‍पणियां:

    1. मौत को मत सिखा
      बस मंतर चला
      उसे भी नहीं पता
      अपना अता पता ।

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    2. उत्तर
      1. रविकर जी को शुक्रिया कामनाएं

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    3. Aapke achchhe swasthy ki kaamna hai... Jaldi swasth ho, aayushman ho...

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    4. जीवंतता से जीने का
      यही है मेरा कारगर मंतर।
      इस मंतर के आगे मौत भी हार जाती है... शुभकामनायें...

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      1. स्‍वस्‍थ कामनाएं ही स्‍वस्‍थ बनाती हैं संध्‍या जी शुक्रिया जी

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    5. कर लिया है तय
      डर कर मैं एक बार भी नहीं मरूंगा

      आमीन......!!

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    6. उत्तर
      1. मंतर सभी तार देते हैं बशर्ते कि काम के हों। आभार अशोक जी

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    7. वाह एक सशक्त एवं प्रभावशाली रचना....

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      1. ताकत को और ताकतवर एवं प्रभावशाली बनाने के लिए पल्‍लवी जी धन्‍यवाद।

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    8. सन्दर्भों से जुडी सामयिक रचना .

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    9. फेसबुक जीने नहीं देगा,हम मारने नहीं देंगे !

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    10. जीवंतता से जीने का
      यही है मेरा कारगर मंतर

      शुभकामनाएँ !
      सादर !

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    11. मरना तो है ही मगर अभी क्यों आना, कुछ और जो काम शेष है ...कर लें फिर चलते हैं !

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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