हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की अगर असामयिक मौत होती है तो इसकी जिम्‍मेदार सिर्फ फेसबुक नहीं और भी बहुत से कारण होंगे ?

आजकल फेसबुक से होने वाली हानियों पर सबकी तीखी नजर है। इंसान यह तो चाहता है कि वह तकनीक का पूरा लाभ उठाए लेकिन हिंदी ब्‍लॉगर संतोषी त्रिवेदी कहते हैं कि वह इस विषय पर  होने वाली हानियों से सचेत नहीं रहना चाहता और बुराईयों की गिरफ्त में आ जाता है। अगर वह विवेक का समुचित इस्‍तेमाल करे तो कोई तकनीक कभी भी नुकसानदेह नहीं हो सकती है। 

फेसबुक से हो‍ने वाले नुकसान से सब परिचित हैं क्‍या जो पाठक इस पोस्‍ट को पढ़ रहे हैं, वे अंतर्जाल और इससे जुड़ी हुई खामियों से परिचित नहीं हैं। ऐसा तो नहीं माना जा सकता कि वे सिर्फ इस माध्‍यम की खूबियां ही जानते हैं और खामियों का उन्‍हें इल्‍म नहीं है। इस विषय पर चौखट ब्‍लॉग के पवन चंदन का मानना है कि फेसबुक हमारा बहुत उपयोगी समय हमसे छीन लेना है। इस मात्र मनोरंजन और समय पास करने का साधन तो माना जा सकता है लेकिन इसमें लगाए गए समय की भरपाई से लिए इससे अभी आय प्राप्ति के कोई विकल्‍प नहीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि फेसबुक इससे इसकी प्रत्‍येक एप्‍लीकेशन से भरपूर कमाई के लिए जुटा हुआ है। 

कमाई किसी भी जरिए से अगर समुचित मानवीय नैतिकताओं को ध्‍यान में रखकर की जाती है तो उसमें कोई बुराई नहीं है। आखिर पैसे की जरूरत कदम दर कदम पड़ती है। ऐसे में अगर कोई माध्‍यम इसकी स्‍वीकृति कानूनों के तहत देता है तो उसे अपनाने में कोई बुराई नहीं है। हिन्‍दी ब्‍लॉगर रवीन्‍द्र प्रभात की राय इसलिए महत्‍व रखती है क्‍योंकि वह इस संबंध में पुरस्‍कारों के जन्‍मदाता है। उनके मन में और कार्य में इसके उदाहरण रोजाना दिखाई दे रहे हैं। 

इस पर चर्चा करते हुए प्रगतिशील ब्‍लॉग लेखक संघ के मनोज पांडेय का मानना है कि माध्‍यम कोई बुरा नहीं होता बशर्ते कि उपयोगकर्ता सजग रहे और इसकी बुराईयों की ओर खिंचाव महसूस न करे। मनोज हिंदी ब्‍लॉगिंग के उत्‍थान के लिए सहजता के साथ सक्रिय लोगों की टीम को लेकर कार्य कर रहे हैं। 

हिन्‍दी ब्‍लॉगर और एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन अपने मन की बात बतलाते हुए कहते हैं कि इस माध्‍यम पर सिर्फ टिप्‍पणी में समय बरबाद न करके, रचनात्‍मक कार्यों के करने में जुटना अधिक श्रेयस्‍कर है। सुमन नाइस फेम टिप्‍पणीकर्ता हैं।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि माध्‍यम कोई बुरा नहीं है लेकिन जहां पर रचनाकार दिग्‍भ्रमित हुआ तो उससे साहित्‍य की और माध्‍यम की रचनात्‍मकता को हुए नुकसान की तो भरपाई की जा सकती है और न उसे रोका ही जा सकता है। इसी प्रकार हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में आजकल जो गिरावट का स्‍तर देखने को मिल रहा है, वह ब्‍लॉगिंग में दिखाई दे रहे मतभेद और मनभेद का सबब है। इससे बचने के प्रयास सभी कोअपने-अपने स्‍तर पर करने चाहिएं। 

आजकल किसी को किसी की अच्‍छी बात भी नहीं सुहाती है और लोकप्रियता पाने के क्रम में ऐसी उलजुलूल बचकानी हरकतें स्‍वाभाविक हैं। जिनकी बानगी फेसबुक पर तो कम, लेकिन हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की पोस्‍टों में अधिक दिखलाई पड़ रही है। 

अभी तो हिंदी ब्‍लॉगिंग में लोकप्रियता पाने संबंधी कोई प्रावधान नहीं है फिर भी तुरंत मशहूर होने और जब जगह चर्चित होने के लिए ऐसे उपाय किए जा रहे हैं जो किसी भी तरह से उचित नहीं माने जा सकते। इससे यह साफ जाहिर है कि सच्‍चे रचनाकार इस माध्‍यम से क्‍यों दूर होते जा रहे हैं, जबकि कुछ ने तो इस माध्‍यम को अभी अपनाया ही नहीं है। 

यदि यही सब रहा तो हिंदी ब्‍लॉगिंग की आकस्मिक मौत के जिम्‍मेदार हम खुद ही होंगे। वह बात अलग है कि मानेंगे नहीं और सामने वाले और उसके कृत्‍यों को ही इसका जिम्‍मेदार ठहराते रहेंगे। वैसे किसी भी नए माध्‍यम के साथ आरंभिक दस बरसों में ऐसी स्थितियों-परिस्थितियों का होना अस्‍वाभाविक नहीं है लेकिन इस कगार से लुढ़कें न और समय रहते संभल जाएं। इसकी बेहद सख्‍त जरूरत है। जिसके लिए अपनी जिम्‍मेदारी का अहसास होना बहुत जरूरी है। 

इसे अगर आप उपदेश नहीं, अपने मन की आवाज मानेंगे तो अवश्‍य ही इससे बचने का हल खोज ही लेंगे अन्‍यथा इस में खो जाएंगे और फिर कभी स्‍वयं को तलाश भी नहीं पाएंगे। 

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बिल्कुल सही विश्लेषण किया अविनाश भाई , लेकिन एक प्रवृत्ति और भी है जो शायद उचित नहीं कही जा सकती । ब्लॉग के और फ़ेसबुक के अपने पाठक हैं , विशेषकर फ़ेसबुक उपयोगकर्ता ब्लॉगिंग में भी हों ये जरूरी नहीं है ऐसा अक्सर देखा गया है , हां ब्लॉगर्स के फ़ेसबुक अकाऊंट जरूर हैं , बेशक उस पर उनकी सक्रियता अलग अलग है इसलिए ब्लॉग पोस्टों पर क्रिया प्रतिक्रिया को फ़ेसबुक पर उठाना और उछालना भी मेरी नज़र में उचित नहीं है ।

    रही बात किसी भी प्लेटफ़ार्म की तो सबके अपने अपने फ़ायदे नुकसान हैं और सिर्फ़ उपयोगकर्ता यानि कि हम ही खुद ये तय कर सकते हैं कि हम उसका कैसा उपयोग कर रहे हैं ।बहरहाल विमर्श के लिए मुद्दा उठाने के लिए शुक्रिया और आभार ।

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  2. मेरी नजर में फेसबुक से ब्लोगिंग को कोई नुकसान नहीं है| हाँ हम ब्लोगिंग के उत्थान में चाहे तो फेसबुक का पूरा फायदा उठा सकते है | मैं कई दिनों से बिना नई पोस्ट लिखे फेसबुक से प्रतिदिन सौ से ज्यादा पाठक ज्ञान दर्पण .कॉम पर लाने का प्रयोग कर फेसबुक की भूमिका का फायदा उठाने का उपक्रम कर चुका हूँ |
    ब्लोगिंग के उत्थान में शानदार भूमिका है फेसबुक की

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    1. बिन्‍कुल सही और तथ्‍यपरक जानकारी है। मेरा अपना अनुभव भी बिल्‍कुल सौ फीसदी यही है।

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