कमीना (लघु कथा)

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  •   छज्जन मियां काफी समय से सड़क पर परेशान खड़े थे. वहां से गुजरती हर गाड़ी को रोकने की उन्होंने कोशिश कर ली थी, लेकिन उन्हें निराशा ही मिली. ज्यों-ज्यों रात बढ़ रही थी  छज्जन मियां दिल की धडकनें भी तेज होती जा रहीं थी. आखिर उनकी म्हणत रंग लाई और एक मोटर साइकिल उनकी मदद  के लिए उनके पास आकर रुकी. अब छज्जन मियां तनावमुक्त हो मोटर साइकिल पर पीछे बैठ चले जा रहे थे. तभी मोटर साइकिल सवार ने उनसे पूछा, "आप इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे थे?" ऐसा लगा कि उस आदमी ने  छज्जन मियां  की दुखती रग पर हाथ रख दिया हो. छज्जन मियां नाराजगी और गुस्से के मिले-जुले भाव संग बोले, "क्या बताएँ हुजूर दुकान बंद करके घर को आ रहे थे, पर रास्ते मे पुलिसवाले मिल गये और हमारी गाड़ी ही जब्त कर ली." "पुलिसवाले ने आपकी गाड़ी क्यों जब्त कर ली?" मोटर साइकिल सवार ने पूछा. 
     
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