पुस्‍तक ही है हमारा : कल, आज और कल : ब्‍लॉग विमर्श

पुस्‍तक कल
पुस्‍तक आज
पुस्‍तक कल

कल कल
विचारों की
करे अविकल

चले विचारों की
तेज साईकिल

न फैलाए प्रदूषण
तेज, तीक्ष्‍ण न भीषण

पुस्‍तक कल
पुस्‍तक आज
पुस्‍तक कल

काल को करे विजय
पुस्‍तक इतनी सबल ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. ब्‍लॉगिंग पर एक और पुस्‍तक प्रकाशित हो गयी ?
    आप दोनों को बधाई !!

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  2. हो गयी नहीं, होने की तैयारी में है
    अफवाह को हवा की तरह उड़ा दिया गया है।

    उत्तर देंहटाएं

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