अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!!

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  • vijay kumar sappatti
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  •  कुछ दिन पहले तक मेरी हालात बहुत खराब थी . मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी  . हर कोई मुझे बस टेंशन दे कर चला जाता था, जैसे मैं रास्ते का भिखारी  हूँ और हर कोई मुझे भीख में टेंशन  दे जाता था, मैं बहुत दुखी था , अटेंशन पाने के लिए मैंने अलग अलग रास्ते अपनाने शुरू कर दिए .


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    1 टिप्पणी:

    1. आदरणीय अविनाश जी ,

      आज मेरा लेखकीय जीवन धन्य हो गया .आपका कमेन्ट मेरे लिये सबसे बड़ा प्रसाद है . आपका शिष्य बनकर एक गुरु से जो आशीर्वाद प्राप्त होना था . वो मुझे मिल गया. आपको मेरा लेख अच्छा लगा . मन को एक पवित्र तृती प्राप्त हुई.

      आपका दिल से धन्यवाद.

      विजय

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