भाग्य (लघु कथा)

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  •           निशा और रेनू दोनों ही खेलने में मस्त थीं. पास ही एक पेड़ के नीचे बैठी उनकी सहेली कावेरी रो रही थी. तभी सामने से एक एक ज्योतिषी बाबा आते हुए दिखाई दिए, जोकि पूरे गाँव में भविष्य बताने के लिए प्रसिद्ध थे. बाबा को देखकर निशा और रेनू अपना भविष्य जानने के लिए उनकी ओर दौड़ी, लेकिन बाबा का ध्यान सबसे पहले रोती हुई कावेरी की तरफ गया. वह उससे बोले, "बेटी मेरे पास आ तेरा भविष्य बताता हूँ". कावेरी बोली "बाबा आप मेरी सहेलियों का ही भविष्य बता दो, क्योंकि मेरे पास आपको देने के लिए पैसे नहीं हैं." बाबा हँसकर बोले, "बेटी मैं तो पहले तेरा ही भविष्य बताऊँगा. तू पैसे की चिंता मत कर. मैं तुझसे एक पैसा नहीं लूँगा." 
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