एक पत्र पटाखों के नाम

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  • प्यारे पटाखों
    सादर फटस्ते!
    आजकल तुम सब बहुत खुश होगे कि दीवाली को कुछ ही दिन शेष बचे हैं। तुम्हारा मन दीवाली के दिन मिल-जुल कर फट-फूट कर धमाका करने को बेताब हो रहा होगा। हालांकि अभी कुछ ही दिन बीते हैं रावण और उसके पारिवारिक बंधुओं के अंजर-पंजर को पटाखों द्वारा फटे हुए किन्तु तुम्हारे भीतर की फटकर धमाका करने के इच्छा अपनी प्रवृत्ति अनुसार दिनों-दिन बलवती होती जा रही है।जब तुम सब धमाका कर फूटोगे-फटोगे, जलोगे-मरोगे तो फैलाओगे ध्वनि प्रदूषण जो सुनने की शक्ति क्षमता से होगा कई गुना अधिक। जिस प्रकार ढोल को हद से अधिक पीटने से वह फट जाता है उसी प्रकार कईयों के कान के परदे भी तुम्हारे धमाकों की तेज ध्वनि को सुनकर तार-तार हो जायेंगे। आगे पढ़ें...

    4 टिप्‍पणियां:

    1. शुक्रिया पाण्डेय जी आपको भी सपरिवार दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं...

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    2. शुक्रिया रेखा जी आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं...

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