एक लघुकथा

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  • Kajal Kumar
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  • विदेशी - "जब हमारे यहां ये पाया जाता है कि किसी जगह अक्सर सिगरेट के टुकड़े मिल रहे हैं तो ये समझा जाता है कि वहां एशट्रे की आवश्यकता है, सरकार वहां एक एशट्रे रखवा देती है."
    भारतीय - 'हमारे यहां जब लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर मूत्र-विसर्जन करते पाया जाता है तो सरकार उस दीवार पर लिख देती है -"देखो गधा पेशाब कर रहा है."
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    7 टिप्‍पणियां:

    1. बढ़िया प्रस्तुति |
      हमारी बधाई स्वीकारें ||

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    2. काजल भाई बहुत खूब लेकिन इसे लघुकथा की बजाय चुटकुला कहना ज़्यादा बेहतर होगा. शुभकामनाएं...

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    3. गधों के न आंखें होती हैं
      और न दिमाग
      बशर्ते वे इंसान के
      रूप में होने चाहिए।

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    4. @ सुमित प्रताप सिंह जी
      आजकल लघुकथा के रूप में चुटकुले कहने का ही रिवाज़ जो चल निकला है :)

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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