पानी के बुलबुले (लघु कथा)

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  • साधु महाराज रिमझिम बारिश में धरती से निकल रहे पानी के बुलबुलों को देखकर काफी देर से मुस्करा रहे थे. उनके इस प्रकार के आचरण को देखकर उनके पैर दबा रहे शिष्य ने उनसे पूछा, "महाराज क्या बात है? आज आप इतना क्यों मुस्करा रहे हैं? अरे ऐसी कोई बात नहीं है शिष्य। बस ऐसे ही कुछ पुरानी बातें याद आ गईं." आगे पढ़ें

    4 टिप्‍पणियां:

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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