मैं शनिवार को नर बलि देती हूँ

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  • Anil Attri
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  • मै नर बलि देती हूँ ---मैं शनिवार को नर बलि देती हूँ ---अब तक मैं छ नर बलि दे चुकी हूँ ---ये सातवीं बलि दे रही थी ----ये कहना है उस महिला का जिसे भीड़ ने एक एक साल के बच्चे को गंदे पानी के तालाब में फैकते हुए पकड़ा और उसकी जम कर पिटाई कि -----ये बेहद सनसनीखेज मामला है राजधानी के भलस्वा थाने का ----जहाँ पुलिस ने उस महिला को गिरफ्तार कर लिया है ---
    ........ ये वही चुनरी है जिसमे लपेट कर इस एक साल के मासूम को पानी में फेंक कर बलि देने कि कोशिश कि गयी थी ----वक़्त लगभग रात के दस बजे का होगा ---जब कमलेश अपनी घर से बाहर निकली ---उस समय उसका एक साल का बेटा रो रहा था ----उसके बाद कमलेश अपने काम में मशगुल हो गयी और बेटे का ख्याल भी जाता रहा ---मगर जैसे ही उसे अपने बेटे का ख्याल आया वो पागलों कि तरह उसे ढूंढने लगी --- कमलेश ने बच्चे कि जानकारी के लिए शिला से पूछा मगर शीला हर बात का गोल मोल जबबा ही देती रही...तभी गली में शोर मचा कि एक लाल कपडे वाली औरत ने कसी बच्चे को तालाब में फैंक दिया..कुछ लोगों ने उसे निकला तो वह कमलेश के कलेजे का टुकड़ा निकला..

    .................यह वही तालाब है जिसमें इस मासूम को तालाब में फैंका गया..इस मासूम कि किस्मत अच्छी थी कि उस समय तालाब के पास कुछ बच्चे टहल रहे थे..बच्चों ने लाल कपडे में शीला को कुछ लपेटकर ले जाते हुए देखा ... बच्चे कुछ दूर हुयी तो शीला ने उस लाल कपडे को पानी में फैंका और तेज़ी से भाग गयी...पानी से जब बच्चे कि आवाज आयी तो लड़कों ने पास जाकर देखा तो उन्हें कीचड़ यह जिंदगी और मोत से झूताता नजर आया...
    35 साल कि शीला ने इस मासूम को तालाब में क्यों फैंका..? जब भीड़ ने महिला कि पिटाई कर इसका जाब पूछा तो सबके होश उड़ गयी..महिला ने लोगों को बताया कि वह शनिवार को नरबली देती है..अब तक 6 बलि दे चुकी है और यह सातवें थी..महिला ने भीड़ कि पिटाई के डर से यह सब कहा हो लेकिन उसका यह कमरा और तंत्र मन्त्र में उसके गहरे विश्वाश को दर्शा रहे है, वहीँ इस इलाके से पिछले काफी समय से बड़ी तादाद में गायब हो रहे रो बेमोट मार रहे बच्चे भीड़ के आरोपों को सच के नजदीक ला रहे है...महिला के न इस मासूम से कोइ रंजिस थी और इसके परिवार से..फिर उसने क्यों इसे तालाब में फैंका..? यह सवाल भी भीड़ का आरोपों का जबाब दे रहा है...लेकिन वहीँ भलस्वा थाना पुलिस का कहना है कि वह महिला के खिलाफ बच्चा ले जाने का मामला दर्ज कर रही है...21 वी सदी में दिल्ली जैसे शहर में भी अन्धविश्वाश कायम है चाहे वह भीड़ का हो या उस महिला का..यह घटना इसी घटना का प्रमाण है..
    अनिल अत्री दिल्ली ...............

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    6 टिप्‍पणियां:

    1. कहते हैं मानवीय संवेदना महिलाओं में कुछ अधिक होती है, लेकिन यहाँ तो ठीक इसके विपरीत भयानक नज़ारा था ! अंधविश्वास की पराकाष्ठा इंसान को हैवान बना देती है. यह घटना इसका एक ज्वलंत उदाहरण है. उस पत्थर दिल महिला को क़ानून ज़रूर दण्डित करेगा ,लेकिन उस मासूम का क्या हुआ ,जिसे तालाब में फेंका गया था . वह सकुशल तो है ना ? ईश्वर उसे सलामत रखे और लंबी उम्र दे .

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    2. यह सच है कि आज दिल्ली और एन सी आर में जितना अंध विश्वास है उतना गावों में भी नहीं रह गया है.... यहाँ तो तान्त्रिकों और ज्योतिषों की दुकाने बराबर फल फूल रही हैं और यही ऐसी जघन्य हरकतों के लिए भोले भाले लोगों को उकसाते रहते हैं

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    3. विज्ञानं आधारित सोच का फौरी विकास पर समाज में किया जाना जरूरी है.एनजीओ समूहों को राष्ट्रिय स्तर पर जुट जाना चाहिए.

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