शुकदेव जी महाराज को कथाओं से आजाद कराये ...





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पूजा धूम धाम से ..लाखों का खर्च मंडप पर ...सुंदर सुंदर झाकियां ...आसन पर कथा वाचक पंडित जी महाराज ....आगे और कई छोटे बड़े नेता ....कथा का बाचन चल रहा हैं . ... मैं भी पहुचा किसी के बुलावे पर ...मंच भी देखा मंडप भी देखा ...झूमते भक्त भी देखे ....शुकदेव जी महाराज के भी दर्शन हुए ...बड़े भाग्य आज शुकदेव जी महाराज के दर्शन हो गए ...बोलो शुकदेव जी महाराज कि जय .....चारों तरफ जय जयकार........
......... मैं ( अनिल अत्री ) अपने एक सहयोगी पवन भार्गव व दुसरे नरेश कुमार के साथ गया था ......चारों तरफ जय जयकार ... मेरा ध्यान तो शुकदेव जी महाराज पर था ....शुकदेव जी महाराज एक लोहे के पिंजरे मैं बंद थे ...अंदर कुछ फल फूल पड़े थे ..जिन्हें लग रहा था शुक जी ने नकार दिया हो या आवश्यकता से अधिक फल शुकदेव जी के आगे डाले गए थे ... ऊँचे ऊँचे स्पीकरों कि आवाज मैं शुक देव जी फडफडा रहे थे ....छूटने का भाव तो आखिर शुकदेव जी भूल ही गए थे हर रोज यही इसी लोहे के घर मैं रहकर आदि हो गए ..ये लोहे का कुछ सेंटीमीटर का पिंजरा ही इनका फल फूलों वाला उपवन था ....बेचारे का इस जन्म का उपवन ने इन कथाकारों ने छीन लिया अब यही जिंदगी हैं शुकदेव जी महाराज कि ...
कथा मैं शुकदेव के नाम पर निर्दोष शुक ( तोते ) को बन्दक बनाकर क्यों रखा जाता हैं ...????????
क्या आर्टिफिसियल तोता रखकर पूर्ती नही कि जा सकती ??????????
क्या ज़िंदा पक्षी को बन्दक बनाकर रखना कोई धर्म कहता हैं ???
हो सकता हैं धर्म मैं कहीं लिखी हो पर इस बात कि क्या गारंटी कि ये बात भगवान ने खुद लिखी ...हो सकता हो किसी स्वार्थी पाण्डेय ने लिख दी हो ...
यदि तोता कथा मैं जिन्दा बंधक बनाकर रखना जरूरी हैं तो क्या कंस का वध असली नही हो सकता ....
कंस का अभिनय करने वाले का तो फिर वध जरूरी है ........
अब बुद्धिजीवी समाज से आशा है कि वे इस शुकदेव जी महाराज को कथाओं से आजाद कराये ... ज़िंदा तोता रखने कि बजाय इसका प्रतीक रखेंगे तो शायद भगवान ज्यादा खुश होंगे ...शुकदेव जी महाराज भी तभी खुश होंगे जब उनके नाम पर किसी जीव को सताने कि बजाय उसके प्रतिक से काम चलाए ....
कथा सफल करनी हैं तो ज़िंदा शुक नही बल्कि उसका प्रतीक रखो तभी कथा सफल होगी ...........................
घर में भोजन ये सोचकर बनाए की भगवान का प्रसाद बना रहे हें ......ऐसा भोजन परिवार में सभी को तृप्ति देगा और पोषक होगा
कथा वाचक परम पूज्य व्यास: श्री संजय क्रिशन ठाकुर जी महाराज ने श्रीमद भागवत कथा के दोरान कहा की भगवान भाव के भूखे होते है मित्र भाव से देखोगे तो मित्र की तरह मिलते हैं , गुरू भाव से देखोगे तो गुरू की तरह मिलते हैं श्री ठाकुर जी ने कहा की घर में भोजन ये सोचकर बनाए की भगवान का प्रसाद बना रहे हें ......
इसके बाद गोवर्धन पूजा की गई मंच पर विराजमान श्री श्री १००८ श्री राघवा नन्द सरस्वती जी महाराज की उपस्थिति में गुलाब सिंह राठोर ने भजन गाया कि ....हो गए दर्शन तुम्हारे गुरु जी , खुल गए भाग्य हमारे जी .......पूरा पंडाल ही भाव विभोर हो उठा ..श्री राघवानंद सरस्वती जी महाराज ने ज्ञान सुधा प्रवाहित करते हुए कहा कि जेसे हमारे यहाँ सविंधान हैं प्रभू के वहाँ भी संविधान हैं उसी संविधान के अनुसार कर्मों का फल मिलता हैं ज्ञान सुधा वर्षण में बड़े छोटे सभी एक समान थे सभी धरती पर आसन लगा कथा श्रवण किया

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अनिल अत्तरी दिल्ली ................
http://anilattrihindidelhi.blogspot.com

7 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा लिखा है और सही कहा है।

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  2. dharm ke nam par kitana adharm hota hai ye dekhane ka achchha prayas hai.....

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  3. यह सब पखांड कर रहे हे,अगर भारत मे लोग इतने ही धार्मिक हे तो फ़िर सब दुखी क्यो हे? यह सब नारिया घर जा कर अपनी सास ओर बहूयि से क्यो लडती हे?ओर ऎसे स्वामी रोज पकडे जाते हे... धन्यवाद एक सच दिखाने के लिये

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