मेरी भी बात सुनो मम्मा

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  • जी हाँ ,बच्चे को स्कूल भेज कर इतने निश्चिन्त मत हो जाईये|अपने लाडले के लिए शहर का चुनिन्दा स्कूल खोज कर और उसकी फीस भरकर ही आपका दायित्व समाप्त नहीं हो जाता | नवंबर कान्वेंट विद्यालयों में नन्हे मनों के प्रवेश का समय होता है हर तरफ मारा-मारी है माता पिता हीनही पूरा परिवार उनके प्रवेश को लेकर चितित है | और अब पूरी जुगाड लगाकर प्रवेश भी हो गया है |माता बहुत खुश है पर उस नन्हे मन पर दबाव बहुत अधिक है | सबकी अपेक्षाए उस नन्ही जान से जुड गई है|अंकों और प्रतिशत का भूत अभी से सवार हो गया है | मम्मियो के मन खुशियों से भरे-पूरे है | अब वह इठला -इठला कर बता रही है -पता है उस स्कूल में प्रवेश कितना कठिन है पर हम तो गंगा नहा लिए| मुझे आश्चर्य हो रहा है कि पहले तो बेटी के हाथ पीले कर माता-पिता गंगा नहाते थे अब उस शिशु के विद्यारंभ पर ही इति हो गई |
    बच्चा नए माहौल और विदेशी भाषा के मध्य अपने को अजनबी पा रहा है | सुबह देर तक सोना चाहता है माँ के साथ बतियाना चाहता है पर स्कूल बस जो आगई समय हो गया | उसकी नींद भी पूरी नहीं होती तब तक तो उसे बिस्तर से निकालकर नहला धुला कर जबरदस्ती उनीफोर्म पहना कर ताईबेल्ट जूते मौजे से लैस कर जल्दी जल्दी नाश्ता करने के निर्देश देना शुरू हो जाता है | बेचारा क्या करे ?अभी तो वह ढंग से फ्रेश भी नहीं हुआ है पर क्या किया जा सकता है जबरदस्ती लाडले के मुह में नाश्ता ठूसा जारहा है ,पापा टिफिन और बस्ता लेकर खड़े है| सब उसके लिए ही किया जा रहा ही पर उसके मन में क्या चल रहा हैउसे कोई नहीं देखना चाहता | अब इतनी आपाधापी का युग है कि यदि मन वन पर ध्यान देने लगे तो उसके करियर का क्या होगा |उसे तो बहुत बड़ा डाक्टर या इन्जीनिय र नुमा जीव बनाना है और उसके लिए ही ये सारी कवायदे की जा रही है|
    स्कूल पहुँच कर अपनी मेडम को अपने मन की बात बताना चाह रहा है पर वहाँ तो मेडम जी को पाठ्यक्रम पूरा कराबाना है | उनके पास कहाँ समय है इस बकवास को सुनाने के लिए | बस्जो कहा जा रहा है उसे चुपचाप रातो और लिखो| बस एक ही रत है अच्छे नंबर लाओ | भारी बोझ से लड़ा फदा अपराह्न में घर पहुंचता है और सोचता है अब तो छुट्टी हुई | पर माँ को जल्दी है उसे लंच कराने की ,स्कूल का काम पूरा कराने की ,और फिर ट्यूशन वाले सर भी तो चार बजे आजाते है | बेचारी क्या करे | बच्चा खेलने के लिए तरस रहा है उसका मन है माँ से ढेरो बाते करे ,अपने स्कूल की फिजूल वाली अपने दोस्तों वाली बाते बताएं , अपने दोस्त के विषय में बताना चाहता है पर उसे चुपचाप केवल वही करना है जो मम्मा कह रही है आखिर उसके करियर का सवाल जो है |
    अब शाम हो गई ,अब होबी क्लास के लिए जाना है ,स्विमिंग पूल लेजाना है और अब कम्पूटर सीखना भी तो बहुत जरूरी है |लो सोचा था शाम तो अपनी होगी वह भी गई|
    रात हो गई| पापा घार आगये हैं | आते ही पूछते है बेटा होम्बर्क पूरा हो गया है या नहीं और कुछ नहीं क्या पापा दिन भर बाद तो आपको देखा सोचा था माँ नहीं तो कम से कम आप तो गोदी लोगे कुछ मेरी सुनोगेपर आप भी| बच्चा रूआसा हो आया है | जल्दी जल्दी डिनर लगा दिया है बेटा जल्दी खाऊ और जल्दी बिस्तर पर जाओ नहीं तो सुबह स्कूल जाने में फिर देर हो जायेगी |
    लो अब पूरी जिंदगी यही दिनचर्या जीनी है|

    3 टिप्‍पणियां:

    1. बीनाजी ... इसे उम्मीदों का बोझ कहें या आज की तेज रफ़्तार जिंदगी के साथ चलने की कवायद.... बचपन तो बस किस्से कहानियों में ही रह गया है..... सही बातें लिखी आपने सहमत हूँ....

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    2. बच्चों की बातें तो अम्मा सुनती थी!
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      मम्मी को फुरसरत ही कहाँ है?

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
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