आज सुबह चार बजकर तैंतीस मिनिट पर क्‍या हुआ, भई क्‍या हुआ - हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की तरंग

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  • अविनाश वाचस्पति
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    इसमें आप कुछ तलाशिए
    तलाशेंगे आप
    आपको मानेंगे हम
    वैसे नहीं है
    यह कोई जंग
    फिर भी इसमें
    दिखलाई देते हैं
    ब्‍लॉगिंग के रंग।

    2 टिप्‍पणियां:

    1. ये सब कथा कहानी छोड़ कर मेल पढ़ कर निपटाईये. कुल ५६६०६ मेल में से ३८७११ बिना पढ़ी रखी हैं. काम की न हो तो डिलीट करिये. बाकी ४.३३ पर इतना जरुर हुआ कि आपने स्क्रिन शॉट लिया और अजब बात है, इतनी इतनी सुबह सुबह काफी लोग चैट पर मौजूद हैं.

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    2. क्‍या माजरा है समझ नहीं आ रहा।

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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