सद्भाव के डंपर्स ने उडा दिए सडकों के धुर्रे

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  • सडक किनारे पडे बोल्डर दे रहे दुर्घटना को न्योता

    यातायात प्रभारी से कार्यवाही की अपेक्षा
     
    कैसे गुजरें एक डेढ फिट के गड्ढों से

    आईएसओ सर्टिफाईड होना चाहिए काम

    (लिमटी खरे)

    सिवनी। फोरलेन आएगी, फोरलेन बचेगी, फोरलेन जाएगी इसी उहापोह के बीच फोरलेन निर्माण करा रही निर्माण कंपनियों की मनमानियां जारी हैं, पर न तो जिला प्रशासन और न ही फोरलेन बचाने के लिए आगे आईं संस्थाएं ही इस दिशा में कोई पहल ही कर पा रही हैं। सिवनी से नागपुर मार्ग पर जगह जगह सडक पर बिखरी पडी बडी बडी बोल्डरनुमा चट्टाने सरेआम दुघटनाओं को न्याता दे रहीं हैं और सभी खामोशी से दुर्घटना घटने की बाट जोह रहे हैं।

    एसा नहीं कि सिवनी जिले में नेतागिरी करने वाले नुमाईदे सिवनी से दक्षिणी दिशा में नागपुर जाने वाले मार्ग से न गुजरते हों। बावजूद इसके सडक पर जगह जगह सडाकों पर काले पत्थरों के ढेर उन्हें दिखाई न पडते हों। इसके साथ ही साथ सडकों पर मिट्टी के ढेर भी जहां तहां देखने को मिल जाते हैं। वस्तुतः ये आवागमन के दौरान दुर्घटनाओं के घटने का कारक बन सकते हैं।

    गौरतलब होगा कि स्वर्णिम चतुर्भुज और इससे जुडे उत्तर दक्षिण और पूर्व पश्चिम गलियारे का निर्माण का काम भी गुणवत्ता के हिसाब से आईएसओ से प्रमाणित होना चाहिए। विडम्बना ही कही जाएगी कि बिना सुरक्षा नोटिस, निर्माण कार्य के दोनों ओर बिना दोरंगी पट्टी बांधे ही इसका काम नब्बे फीसदी करा दिया गया है, पर किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। इस सारे मामले में नियम कायदों का सरेआम माखौल उडाकर इसका निर्माण करा रही कंपनियों ने अच्छी मलाई काटी है, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

    बीती ताहि बिसार दे की तर्ज पर भी अगर वर्तमान परिस्थितियों में देखा जाए तो सिवनी से नागपुर मार्ग पर जगह जगह पडे पत्थरों के ढेर से आवागमन प्रभावित हुए बिना नहीं है। पुलिस के आला दर्जे के सूत्रों का कहना है कि जिले में यातायात प्रभारी और जिला पुलिस अधीक्षक का कार्यक्षेत्र बराबर ही होता है। इस लिहाज से यातायात प्रभारी की नजरें भी इस पर इनायत न हो पाना आश्चर्य का ही विषय माना जा सकता है। परिवहन विभाग के अधिकारी तो लक्ष्मी के मद में इतने चूर हो चुके हैं कि उन्हें लोगों की सुख सुविधाओं की परवाह कतई ही नहीं है, पर संजीदा यातायात प्रभारी से तो अपेक्षा की जा सकती है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

    यहां एक बात और गौरतलब है कि सडक के जिस भाग का निर्माण कथित तौर पर माननीय न्यायालय द्वारा रोका बताया जा रहा है उस भाग के धुर्रे अगर उडे हैं तो वह सडक निर्माण में लगी इन दोनों ही कंपनियों सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी के ओवर लोडेड डंपर्स ने ही उडाए हैं। कहा जा रहा है कि इन कंपनियों में बडे कद के राजनेताओं की भागीदारी है अतः इन दोनों ही कंपनियों का कोई भी कुछ नहीं बिगाड सकता है।

    आश्चर्य का विषय तो यह है कि जिला प्रशासन भले ही राजनेताओं के दबाव में आकर इन कंपननियों के खिलाफ कार्यवाही करने से भले ही कतरा रहा हो पर लोगों के हक की लडाई के लिए आगे आने वाले गैर सरकारी संगठनों की इस मामले में चुप्पी वाकई शोध का विषय ही कही जाएगी।
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