घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं क्या करें

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अविनाश जी को हार्दिक शुभ कामाओं सहित अपेक्षा है सभी से कि हम सब 
विवाह की रजत,स्वर्ण,प्लेटिनम,डायमंड, वर्षगांठ मनाएं . हर परिवार जो 
अटूट बंधन के सूत्र सुझाएं .........................................................!!
मध्यप्रदेश सरकार ने घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और उनके बच्चों को सुरक्षा देने सहायता करने घरेलू हिंसा प्रतिरक्षण अधिनियम २००५ एवम नियम २००६ के क्रियांवयन के वास्ते "उषा-किरण योजना" को आकार दिया है.जिसके तहत  प्रदेश सरकार ने प्रदेश के महिला बाल विकास के बाल विकास परियोजना अधिकारीयों को संरक्षण अधिकारी का दर्ज़ा देकर पीढ़िताओं को हर संभव मदद की व्यवस्था तक कर दी है. प्रदेश सरकार का यह कार्य अन्य प्रदेशों के लिये अनुकरणीय हो सकता है.   फ़िलहाल देखिये घरेलू हिंसा रिपोर्ट का प्रारूप जिसे हम शिकायत कर्ता के साथ प्रारम्भिक चर्चा के बाद फ़ौरन तैयार करवा कर परिवार न्यायालयों को भेज देते हैं. और फ़िर अदालत के द्वारा दिया जाता है अंतरिम आदेश जिसका पालन भी करवातें हैं. सामान्यत: परिवार में पुलिस की मदद के बगैर आवेदिका को राहत दिलाते इस अधिनियम की विषेशता है कि कोशिश हो कि कोई महिला अनावश्यक परेशान न हो और उसे सहज पारिवारिक माहौल में सहायता मिले. ऐसा हो भी रहा है परिवारों को जोड़ती इस व्यवस्था में काउंसलिंग का बिंदू सबसे महत्वपूर्ण है. हमारी कोशिश ये होती है कि विवाह कायम रहे. समझाइश के लिये अधिवक्ता,सायकोलाजिस्ट, स्वयम सेवीयों की मदद हमें मिल ही जाती है...... 
प्रारूप- प्
(नियम 5(1) और नियम 17(3) देखें)
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 (2005 का 43)
धारा 9(ख) और धारा 37(2) के अधीन घरेलू घटना की रिपोर्ट

1.    परिवादी/व्यथित व्यक्ति के ब्यौरे:
1.    परिवादी/व्यथित व्यक्ति का नाम:     
2.    आयु               ः 
3.    साझी गृहस्थी का पता: 
4.    वर्तमान पता         ः  ......................................................................................................
.........................................................................................................................................................
5.    दूरभाष नं. यदि कोई हो: ......................................................................................................

2.    प्रत्यर्थियों के ब्यौरे:
क्र.    नाम    व्यथित व्यक्तियेां से नातेदारी    पता    दूरभाष नं.  यदि कोई हो
01   



           

3.    व्यक्ति की संतानों के ब्यौरे (यदि कोई हों):
(क)    संतानों की संख्या:ः ......................................................................................................
(ख)    संतानों के ब्यौरे  : ..................................................................................................
नाम    आयु    लिंग    वर्तमान में किसके साथ
निवास कर रहे हैं।
           



4.    घरेलू हिंसा की घटनाएं:
क्र    हिंसा की तारीख स्थान और समय    यह व्यक्ति जिसने  घरेलू हिंसा कारित  की    घटना का प्रकार    टिप्पणी   
            शारीरिक हिंसा
(किस प्रकार की उपहति कारित की गई कृपया विनिर्दिष्ट करें   
1               
                
;पद्ध    लैंगिक हिंसा:
(कृपया लागू होने वाले स्तम्भ के सामने (सही) चिन्हित करें।)
ऽ    बल पूर्वक मैथुन
ऽ    अष्लील साहित्य या अन्य अष्लील सामग्री देखने के लिये मजबूर करना
ऽ    आपका अन्य व्यक्तियों के मनोरंजन के लिये उपयोग करना, लैंगिक प्रकृति का दुर्व्यवहार, अपमानजनक, तिरस्कारपूर्ण या आपकी गरिमा का अतिक्रमण करने वाला कोई अन्य कार्य करना, कृपया नीचे दिये गये स्थान पर विनिर्दिष्ट करें।
ऽ    चरित्र या आचरण आदि पर अभियोग/कलंक लगाना
ऽ    दहेज आदि न लाने हेतु अपमान करना
ऽ    पुरूष संतान न होने के लिये अपमान करना
ऽ    अप्रतिष्ठित, अपमानजनक या क्षतिकारक टिप्पणियां/कथन करना
ऽ    उपहास करना


;पपद्ध    मौखिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार करना -
ऽ    निंदा करना
ऽ    आपको विद्यालय, महाविद्यालय या किसी अन्य शैक्षिक स्थान में न जाने पर बल देना
ऽ    आपको नौकरी करने से रोकना
ऽ    घर के बाहर जाने से रोकना
ऽ    किसी विषिष्टि व्यक्ति से मिलने से निवारित करना
ऽ    अपनी इच्छा के विरूद्ध विवाह करने पर बल देना
ऽ    आपको उसकी/उनकी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने पर बल देना
ऽ    कोई अन्य मौखिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार करना -
(कृपया नीचे दिये गये खाली स्थान में विनिर्दिष्ट करें)
विवरण- पूर्व कंडिकाओं में दर्जानुसार

  •     आर्थिक बल प्रयोग
ऽ    आपको या आपकी संतानों को भरण पोषण के लिये धन न देना
ऽ    आपको या आपकी संतानों को खाना, कपड़े दवाईयों आदि उपलब्ध करवाना-
ऽ    घर के बाहर रहने के लिये मजबूर करना
ऽ    आपको घर के किसी भाग में घुसने या उसका प्रयोग करने से रोका जाना
ऽ    आपको आपकी नौकरी करने से निवारित किया जा रहा है या उसमें बाधा डाली जा रही है।
ऽ    नौकरी करने की अनुज्ञा न देना
ऽ    भाड़े पर ली गई वास-सुविधा की दषा में भाड़ा न देना-


ऽ    कपड़ों या साधारण घर गृहस्थी के उपयोग की वस्तुओं के उपयोग की अनुज्ञा न देना-
ऽ    आपको सूचित किए बिना और आपकी सहमति के बिना स्त्रीधन या अन्य मूल्यवान वस्तुओं को बेच देना या बंधक रख देना-
ऽ    आपका वेतन, आय या मजदूरी आदि बलपूर्वक ले लेना-
ऽ    स्त्रीधन का व्ययन करना -
ऽ    बिजली आदि जैसे अन्य बिलों को भुुगतान न करना-
ऽ    कोई अन्य आर्थिक बल प्रयोग -
(कृपया नीचे दिये गये खाली स्थान में विनिर्दिष्ट करें)

विवरण- पूर्व कंडिकाओं में दर्जानुसार


  •     दहेज संबंधी उत्पीड़न
ऽ    दहेज के लिये की गई मांग, कृपया विनिर्दिष्ट करें-
ऽ    दहेज से संबंधित कोई अन्य ब्यौरा, कृपया विनिर्दिष्ट करें
ऽ    क्या दहेज की मदें स्त्रीधन आदि के ब्यौरे प्रारूप के साथ संलग्न हैं
    हां-
    नहीं

  •     आपके या आपकी संतानों के विरूद्ध घरेलू हिंसा से संबंधित कोई अन्य सूचनाः

               







(परिवादी/व्यथित व्यक्ति के हस्ताक्षर या ेअंगूठे का निषान )



5.    संलग्न दस्तावेजों की सूची:
दस्तावेजों का नाम    तारीख    कोई अन्य ब्यौरा
चिकित्सा विधिक प्रमाण पत्र    -    -

चिकित्सक प्रमाण पत्र या कोई अन्य नुस्खा       

स्त्रीधन की सूची       

कोई अन्य दस्तावेज       



6.    वह आदेश् , जिसकी घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के अधीन आपको आवष्यकता है:
क्र.    आदेश    हां/ नहीं    कोई अन्य
1    2    3    4
1.    धारा 18 के अधीन संरक्षण आदेष       
2.    धारा 19 के अधीन निवास आदेष       
3.    धारा 20 के अधीन भरणपोषण का आदेष       
4    धारा 21 के अधीन अभिरक्षा आदेष       
5    धारा 22 के अधीन प्रतिकार का आदेष       
6.    कोई अन्य आदेष (विनिर्दिष्ट करें)       
7.    ऐसी सहायता जिसकी आपको आवष्यकता हो:
क्र.    उपलब्ध सहायता    हां/नहीं    सहायता की प्रकृति
(1)    (2)    (3)    (4)
1.    परामर्शदाता       
2.    पुलिस सहायता       
3.    दांडिक कार्यवाहियां प्रारंभ करने के लिये सहायता       
4    आश्रय गृह       
5    चिकित्सा सुविधाएं       
6.    विधिक सहायता       

8.    किसी घरेलू घटना की रिपोर्ट के रजिस्ट्रीकरण में सहायता करने वाले पुलिस अधिकारी के लिये अनुदेष:
जहां कहीं इस प्रारूप में उपलब्ध करवाई गई सूचना से भारतीय दण्ड संहिता या किसी अन्य विधि के अधीन किया     गया कोई अपराध प्रकट होता है वहां पुलिस अधिकारी -
(क)    व्यथित व्यक्ति को सूचित करेगा कि वह भी दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) के अधीन प्रथम इत्तिला रिपोर्ट दर्ज करके दाण्डिक कार्यवाहियां प्रारंभ कर सकती हैं:
(ख)    यदि व्यथित व्यक्ति दांडिक कार्यवाहियां प्रारंभ करना नहीं चाहती हूं तो घरेलू हिंसा रिपोर्ट में अंतर्विष्ट सूचना के अनुसार इस टिप्पणी के साथ दैनिक डायरी में प्रविष्टि करेगा कि व्यथित व्यक्ति, अभियुक्त के साथ घनिष्ठ प्रकृति के संबंध में होने के कारण घरेलू हिंसा के विरूद्ध संरक्षण के लिये सिविल उपाय जारी रखना चाहती है और उसने यह अनुरोध किया है कि उसके द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर मामले को, किसी प्रथम इत्तिला रिपोर्ट के रजिस्ट्रीकरण के पूर्व समुचित जांच के लिये लंबित रखा जाए।

(ग)    यदि व्यथित व्यक्ति द्वारा किसी शारीरिक उपहति या पीड़ा की सूचना दी गई है उसे तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी और व्यथित व्यक्ति की चिकित्सीय जांच की जाएगी।



स्थान:
दिनांक:                 (संरक्षण अधिकारी/सेवा प्रदाता के प्रति हस्ताक्षर)
नाम:
पता:

(मुद्रा)

निम्नलिखित को प्रति अग्रेषित की गई:-
1.    स्थानीय पुलिस थाना
2.    सेवा प्रदाता/अभियोजना अधिकारी
3.    व्यथित व्यक्ति
4.    मजिस्ट्रेट








प्रारूप-2
(नियम 6(1) देखें)
     घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 (2005 का 43)
                                की धारा 12 के अधीन मजिस्ट्रेट का आवेदन

सेवा में,
मजिस्ट्रेट न्यायालय,
माननीय न्यायिक दण्डाधिकारी,
प्रथम श्रेणी, जबलपुर

(घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005) 2005 की धारा 43 की धारा ..................... के अधीन आवेदन )

यह दर्षित किया जाता है:-
1.    घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा ................ के अधीन घरेलू घटना रिपोर्ट की एक प्रति के साथ आवेदन नि0लि0 द्वारा फाइल किया जा रहा है:-
    (क)    व्यथित व्यक्ति: .......................................................................................................................
    (ख)    संरक्षण अधिकारी:....................................................................................................................
    (ग)    व्यथित व्यक्ति की ओर से कोई अन्य व्यक्ति:.................................................................
    (जो लागू हो तो उसे चिन्हित करें)
2.    यह प्रार्थना की जाती है कि माननीय न्यायालय परिवारी/घरेलू घटना रिपोर्ट का संज्ञान लें और ऐसे सभी कोई ऐसा आदेष पारित करें जो मामले की परिस्थितियों में आवष्यक समझा जाए।
    (क)    धारा 18 के अधीन संरक्षण आदेष पारित करें: और /या
    (ख)    धारा 19 के अधीन निवास आदेष पारित करें: और /या
    (ग)    धारा 20 के अधीन धनीय अनुतोष संदाय करने का प्रत्यर्थी को निर्देष देंः और/या
    (घ)    अधिनियम की धारा 21 के अधीन आदेष पारित करें: और/या
    (ड)    धारा 22 के अधीन प्रतिकर या न ुकसानी प्रदत्त करने हेतु प्रत्यर्थी को निर्देष
        देंः और /या
    (च)    ऐसे कोई अंतरिम आदेष पारित करें जो न्यायालय न्यायसंगत और उचित समझेः
    (छ)    कोई ऐसा आदेष पारित करें जो मामले की परिस्थितियों में उचित समझा जाए
3.    अपेक्षित आदेष:-
    1 धारा 18 के अधीन निम्नलिखित संरक्षण आदेष
ऽ    आवेदन के स्तम्भ 4(क)/(ख)/(ग)/(घ)/(ड)/(च)/(छ) के निबंधानुसार वर्णित किसी कार्य की पुनरावृत्ति को रोकने के लिये प्रत्यर्थी के विरूद्ध ब्योदेष प्रदान करके घरेलू ंिहसा के कार्यो की प्रतिषिद्ध करना।
ऽ    प्रत्यर्थी का विद्यालय/महाविद्यालय/कार्यस्थल पर प्रवेष करने की प्रतिषिद्ध करना।
ऽ    आपको आपकी नौकरी के स्थान पर जाने से रोकने की प्रतिविषिद्ध करना।
ऽ    प्रत्यर्थी (प्रत्यर्थियों) के आपकी संतानांे के विद्यालय/महाविद्यालय,

ऽ    किसी अन्य स्थान पर प्रवेष करने से प्रतिषिद्ध करना।
ऽ    प्रत्यर्थी को आपके साथ किसी प्रकार का कोई पत्र व्यवहान करने से प्रतिषिद्ध करना।
ऽ    प्रत्यर्थी द्वारा आस्तियों को अन्य संक्रामण को प्रतिषिद्ध करना।
ऽ    प्रत्यर्थी द्वारा संयुक्त बैंक लॉकर/खातों के प्रचालन को प्रतिषिद्ध करना और व्यथित व्यक्ति को उसके प्रचालन की अनुज्ञा देना
ऽ    प्रत्यर्थी को व्यथित व्यक्ति के आश्रितों/संबंधितों/किसी अन्य व्यक्ति से उनके विरूद्ध हिंसा रोकेने के लिये दूर रहने का निर्देष देना।
ऽ    कोई अन्य आदेष कृपया विनिर्दिष्ट करें।

2. धारा 19 के अधीन निम्नलिखित निवास आदेष ................
ऽ    प्रत्यर्थी (प्रत्यर्थियों) को।
ऽ    मुझे साझाी गृहस्थी से बेदखल करने या बाहर निकालने से रोकने का आदेष।
ऽ    साझी गृहस्थी के उस भाग में जिसमें निवास करती हूं, प्रवेष करने का आदेष।
ऽ    साझी गृहस्थी अन्य संक्रामण/व्ययन/विल्लंगम्  रोकनेे का आदेष।
ऽ    प्रत्यर्थी (प्रत्यर्थियों) को।
ऽ    उसे साझी गृहहस्थी से हटाने।
ऽ    उसी स्तर की वैकल्पिक वास सुविधा उपलब्ध करवाने या उसके लिये किराये का सदाय करने का निर्देष देते हुए कोई आदेष।
ऽ    कोई अन्य आदेष कृपया विनिर्दिष्ट करें ............................................................................................................................................................................................................................................................
3. धारा 19 के अधीन धनीय अनुतोष  .
ऽ    उपार्जन की हानि बाबत् दावा की गई रकम
ऽ    चिकित्सकीय खर्चे की बाबत् दावा की गई रकम
ऽ    व्यथित व्यक्ति के नियंत्रण में से किसी संपत्ति के नाष, नुकसानी या हटाये जाने के कारण हुई हानि के बाबत् दावा की गई रकम
ऽ    खण्ड 10 (घ) में यथा विनिर्दिष्ट कोई अन्य हानि या शारीरिक या मानसिक उपहति दावा की गई रकम
ऽ    कुल दावा की गई रकम
ऽ    कोई अन्य आदेष कृपया विनिर्दिष्ट करें

4 धारा 19 के अधीन धनीय अनुतोष
ऽ    प्रत्यार्थी को धनीय अनुतोष के रूप में निम्नलिखित व्ययों का संदाय करने का निर्देष देना।
ऽ    खाद्य, कपड़ा, चिकित्सा और अन्य आधारभूत आवष्यकताएं प्रतिमाह रूपये में
ऽ    विद्यालय की फीस और उससे संबंधित अन्य खर्च प्रतिमाह रूपये में
ऽ    गृहस्थी के खर्चे प्रतिमाह रूपये में
ऽ    केाई अन्य व्यय प्रतिमाह रूपये में
ऽ    कुल प्रतिमाह रूपए

4.    पूर्व मुकदमे बाजी का यदि कोई ब्यौरा हो:-
(क)    के न्यायालय में भारतीय दण्ड संहिता की धारा ..........................के अधीन लंबति है।
    ........................................................का निपटारा हो गया है, अनुतोष के ब्यौरा
(ख)    के न्यायालय में भारतीय दण्ड संहिता की धारा ......................के अधीन लंबति है।
    ........................................................का निपटारा हो गया है, अनुतोष के ब्यौरा
(ग) के न्यायालय में हिन्दू विवाह अधिनियम 1956 की धारा .........के अधीन लंबति है।
    ........................................................का निपटारा हो गया है, अनुतोष के ब्यौरा
(घ)    के न्यायालय में हिन्दू दत्तक और भरण पोषण अधिनियम 1956 की धारा .........के अधीन लंबति है। ........................................................का निपटारा हो गया है, अनुतोष के ब्यौरा
(ड)    अधिनियम की धारा ....................... के अधीन भरण पोषण के लिये आवेदन
    अंतरिम भरण पोषण ............................ रूपये प्रतिमाह
    स्वीकृत भरण पोषण ............................ रूपये प्रतिमाह
(च)    क्या प्रत्यर्थी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था।
    एक सप्ताह से कम के लिये
    एक मास से कम के लिये
    एक मास से अधिक के लिये
    कृपया अवधि विनिर्दिष्ट करें।

(छ)        कोई अन्य आदेष ................................................................................................................................. 
                     


प्रार्थना

    अतः आदरपूर्वक यह प्रार्थना की जाती है कि माननीय न्यायालय इसमें दावा किये गये अनुतोष (अनुतोष) स्वीकृत करे और कोई ऐसा आदेष/ऐसे आदेष पारित करे जो माननीय न्यायालय के दिये गये तथ्यों परिस्थितियों में व्यक्ति को घरेलू हिंसा से संरक्षित करने के लिये और न्यायहित में उपर्युक्त और उचित समझे।

संलग्न:                                परिवाद/व्यथित व्यक्ति
तारीख -                               
   मार्फत/काउंसेल


सत्यापन

    तारीख ........... ....................को .......................................(स्थान) पर यह सत्यापित किया गया कि उपर्युक्त आवेदन के पैरा 1 से 12 की अंतवस्तुयें मेरे  ज्ञान से सही हैं और इसका कोई भी बात  छिपाई नहीं गई है।


स्थान:
दिनांक:                                     अभिसाक्षी
संरक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर


_____________________________________________________________

प्रारूप - 3
(नियम 6(4) और नियम 7 देखें)
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधि0 2005 धारा 23(2) के अधीन शपथ पत्र
समक्ष न्यायालय माननीय न्यायायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, जबलपुर
पुलिस थाना        के मामले में

परिवादी                -    .............................................................................

बनाम

प्रत्यर्थी                    -    .............................................................................

शपथ पत्र

    मैं श्रीमती .............................................................पत्नि श्री .....................................................
निवासी-.............................................................................पुत्री श्री .......................................................
निवासी .............................................................................(म.प्र.) पर निवास कर रही हूं, सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करती हूं, और शपथ पर यह घोषणा करती हूं कि:

1.    मैं अपने स्वयं और मेरी पुत्री/पुत्र के     के लिये फाईल किये गये संलग्न आवेदन में आवेदक हूं।
2.    मैं ................................................    की नैसर्गिक संरक्षक हूं।
3.    मामले के तथ्यों और परिस्थ्ािितयों से सुपरिचित होने के कारण मैं इस शपथ पत्र में शपथ लेने में सक्षम हूं।
4.    अभिसाक्षी ..................................................पर प्रत्युर्थी/प्रत्युर्थियों के साथ ........................... से .......................तक रही थी।
5.    धारा (धाराओं) ......................................के अधीन अनुतोष प्रदान करने के लिये वर्तमान आवेदन में दिये गये ब्यौरे मेरे द्वारा/मेरे अनुदेषों पर दर्ज किये गये हैं।
6.    मुझे आवेदन की अंतवस्तुओं अ्रग्रेजी/हिन्दी/किसी अन्य स्थानीय भाषा (कृपया विनिर्दिष्अ करें) में पढ़कर सुना दी गई है और उन्हें स्पष्ट कर दिया गया है।
7.    उक्त आवेदन की अंतवस्तुओं का इस शपथ पत्र के भागरूप में पढ़ा जाये और संक्षिप्तता के लिये उनकी यहां पुनरावृत्ति नहीं की जा रही है।
8.    आवेदक को (प्रत्युर्थियों) के द्वारा घरेलू हिंसा के ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति की आषंका है जिसके विरूद्ध संलग्न आवेदन में अनुतोष चाहा गया है।
9.    आवेदक को (प्रत्यर्थी)  की धमकी दी गई है कि ..................................................................... ..................................................................... ..................................................................... .....................
10    संलग्न आवेदन में मांगे गये अनुतोष अतिआवष्यक है क्योंकि यदि एक पक्षीय अंतरिम आधार पर अंत अनुतोष प्रदान नहीं किये जाते हैं तो आवेदक को अत्यधिक वित्तीय कठिनाई का सामना करना होगा और उसे प्रत्यर्थी प्रत्यार्थियों द्वारा किये जा रहे उन घरेलू हिंसा के कार्यो पुनरावृत्ति/उनके बढ़ने के खतरे में रहने के लिये बाध्य होना पड़ेगा जिसके बारे में द्वारा संलग्न आवेदन में षिकायत की गई है।
11.    इनमें वर्णित तथ्य मेरे व्यक्तिगत ज्ञान और विष्वास में सत्य व सही हैं। इसमें से कोई तथ्य सामग्री छिपाई नहीं गई है।


अभिसाक्षी

सत्यापन
    तारीख ........... मास को सत्यापित किया गया।
12.    उपर्युक्त शपथ पत्र की अंतर्वस्तुए मेरे ज्ञान और विष्वास से सही हैं और इसका कोई भी भाग मिथ्या नहीं है और इसमें से कुछ भी छिपाया नहीं गया है।

स्थान:
दिनांक:                                     अभिसाक्षी

6 टिप्‍पणियां:

  1. अविनाश जी को विवाह की सिल्वर जुबली पर हार्दिक बधाई व शुभकामनायें।

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  2. आप को नहीं शास्त्री जी इसका प्रयोग भाभी जी को करना है

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  3. कृपया यह बताएं कि क्या इस अधिनियम के तहत परिवार की महिला सदस्यों के खिलाफ भी कार्यवाही की जा सकती है या नहीं

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आपके आने के लिए धन्यवाद
लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

 
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