उफ़ ब्लागिरी.कॉम ने तो पसीना छुड़वा दिया..

+पता नहीं किस सर्वर से चलती है ये साईट ...डायल अप दिनों की याद ताज़ा करवा दी इसने, इससे धीमी साईट पर गए ज़माना हो गया था मुझे. पहले तो ये ही नहीं पता चला की url कैसे जमा कराएं. माथा पच्ची करने दे बाद तुक्का लगाया की शायद पहले रजिस्टर करने की चिरोरियाँ करता लगती है ये साईट भी. रजिस्टर करने के बाद भी कल से submit करने की कोशिश कर रहा था ...पर आज सहनशीलता जवाब दे गई.


पहले तो रजिस्टर करो, फिर ब्लॉग का url दो, फिर हर बार पोस्ट का url दो ...और देते ही रहो...कभी टैग लम्बा बताया कभी text अधूरा तो कभी कुछ और अंत तक पोस्ट submit नहीं ही कर पाया .


भैये, एग्रीगेटर बनाया है या मज़ा लेने को बैठे हो.
                                                                                                          -काजल कुमार

10 टिप्‍पणियां:

  1. ब्‍लॉगिरी किसी बाजीगरी से कम नहीं है। आपके अनुभव से तो यही अहसास होता है। हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को भांति-भांति के करतब करवाएगी ब्‍लॉगिरीडॉटकॉम यही लगता है। इससे से बेहतर है कि हिन्‍दी ब्‍लॉगर एग्रीगेटरों के चंगुल में आने से बचे रहें और अपने पाठक तैयार करें।

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  2. बेवफ़ा तेरे इश्क में हमने क्या क्या न किया

    ये ब्लागीरी नहीं आसां बस इतना समझ लिजिए
    लागिन से काम नही चलेगा यु आर एस दिजिए

    जय हो गुरुदेव

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  3. बेवफ़ा तेरे इश्क में हमने क्या क्या न किया

    ये ब्लागीरी नहीं आसां बस इतना समझ लिजिए
    लागिन से काम नही चलेगा यु आर एल दिजिए

    जय हो गुरुदेव

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  4. लगता है यह एग्रीगेटर शेयर्ड होस्टिंग सर्वर पर चल रहा है जबकि इस तरह की साईट जिस पर ट्रेफिक ज्यादा हो के लिए अपना प्राइवेट सर्वर चाहिए जो महंगा भी पड़ता है और मेनेज करने के लिए तकनिकी ज्ञान भी मांगता है |
    शेयर्ड होस्टिंग का सस्ता पैकेज लेकर और फ्री स्क्रिप्ट इन्स्टाल कर सब यही सोचते है कि एग्रीगेटर चलाना बहुत आसान है पर जब अपना सर्वर लेना पड़ेगा तब पता चलता है कि ब्लॉग वाणी व चिट्ठाजगत को ये कितना भारी पड़ता होगा ?

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  5. हा...हा...हा...हा....
    काजल कुमार से मज़ाक .

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  6. ललित शर्मा जी से सहमत.
    इस ब्‍लॉ + गिरी में पोस्‍ट सम्मिट करने के लिए आफिस से छुट्टी लेनी पड़ेगी और आपके बताये अनुसार url दो ...और देते ही रहो.. चलता रहेगा.

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  7. सच है, हमें भी ये किसी मजाक से कम नहीं लगा...

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  8. कभी कभी तो ऐसे ही लगता है कि हमें मनोरंजन का पात्र समझा रहा है...

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