संभालो अपने दिल को

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  • उपदेश सक्सेना
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  •        (उपदेश सक्सेना)
    दिल मानव शरीर का एक मात्र ऐसा अंग है जिसकी सबसे ज़्यादा पूछपरख होती है, चाहे फ़िल्मी गानों में हो या फिर गज़ल-शायरी में. दिल बड़ा ही आवारा किस्म का अंग होता है, यह कब-कहाँ फिसल जाये, इस पर किसी का कोई बस नहीं चलता. यह किसी पर भी आ सकता है, और किसी को भी हलाक़ कर सकता है, मगर जब यह अपनी पर आता है तो जान भी ले लेता है. हालांकि मर्दों के दिल को औरतों के मुक़ाबले ज़्यादा मज़बूत माना जाता है मगर वैज्ञानिकों ने अब कहा है कि मर्द दिल के मामले में औरतों से ज़्यादा फिसड्डी होते हैं. किसी महिला के साथ रिश्तों में आई दरार अथवा उससे संबंधों के विघटन से महिलाओं के मुक़ाबले पुरुष ज़्यादा आहत होते हैं.बशीर बद्र साहब लिखते हैं-
    जिसे ले गई है अभी हवा,वो वरक था दिल की किताब का
    कहीं आंसुओं से मिटा हुआ,कहीं आंसुओं से लिखा हुआ.
    एक अध्ययन में पता चला है कि किसी महिला के साथ संबंधों में खटास आने पर युवापन के दिलों पर काफी ज़बरदस्त असर पड़ता है.विषय विशेषज्ञ इसका कारण साफ़ करते हैं कि महिलायें जहां अपने तनाव को अपनी सखियों में साझा कर लेती हैं, वहीँ पुरुष भीतर ही भीतर घुटते रहते हैं. इस कारण नकारात्मक सोच उन पर हावी हो जाती है, नतीज़े में वे किसी नशे की लत को अपना जीवनसाथी बना लेते हैं.अब तक माना जाता था कि रिश्तों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव का महिलाओं पर ज़्यादा असर होता है, मगर नई शोध ने सभी को हैरान कर दिया है कि रिश्तों में उतार-चढ़ाव का युवकों पर ज़्यादा असर और गंभीर प्रतिक्रिया होती है. हाँ यह भी साबित हो चुका है यदि रोमांस सही तरीके से चल रहा है तो इसमें ज़्यादा लाभ भी पुरुष ही उठाते हैं. सर्वे में पता चला है कि युवक बहुत कम लोगों पर भरोसा करते हैं जबकि महिलायें अपने परिजनों और मित्रों के साथ ज़्यादा क़रीबी रहती हैं. महिलाओं और पुरुषों में भावनात्मक अभिव्यक्ति भी अलग-अलग तरह से होती है. गज़लकार शहरयार की पंक्तियों में-
    दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिये
    बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये
    इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार
    दीवार-ओ-दर को ग़ौर से पहचान लीजिये
    माना के दोस्तों को नहीं दोस्ती का पास
    लेकिन ये क्या के ग़ैर का एहसान लीजिये
    कहिये तो आसमाँ को ज़मीं पर उतार लाएँ
    मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये

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