आयोजन योजना बनाकर किए जाते हैं ....

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • कार्ड पर लिखा स्‍पष्‍ट न हो तो इस पर क्लिक करें और जो इमेज बने उस पर दोबारा से क्लिक करें। अरे, भाई जादू नहीं है, यह तो एक प्रक्रिया है। स्‍कैन की गई इमेज को सही रूप में पढ़ने की।

    कविता लिखने के लिए योजना कैसे बनाएं। कविता तो स्‍वत: स्‍फूर्त होती है। प्रयास से भी कवि बना जा सकता है। पर कविताओं को संकलित करके पुस्‍तक रूप देना आयोजना के अंतर्गत ही आता है। आयोजना सफल हो जाए तो अगला महत्‍वपूर्ण कदम पुस्‍तक को लोकार्पित करके बढ़ाया जाता है। इसलिए बिना योजना के लिखी गई कविता को संकलित कर पुस्‍तक रूप देकर फिर लोकार्पण का आयोजन आज सायं 6 बजे दिल्‍ली में है। पूरी जानकारी के लिए निमंत्रण कार्ड का स्‍कैनबिम्‍ब लगाया गया है। जिनके पास इसकी असल प्रति मौजूद हो, वे आमंत्रित किए गए हैं। कार्ड हो फिर भी भूल जाएं, या कार्ड ले जाना भूल जाएं।  निमंत्रण कार्ड जिसे समारोह में किसी के साथ पहुंचना है, वो निमंत्रण कार्ड को न ले जाए, तो अच्‍छी बात नहीं है। जिस कार्ड के मिलने पर आपने कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बनाई कि आयोजन में शामिल हों परन्‍तु उस कार्ड को ले जाना ही भूल गए। यह स्थिति अच्‍छी नहीं है, न आपके लिए और न कार्ड के लिए। इसलिए जिस कार्ड ने आपको सूचित किया है, उसे भी कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर अवश्‍य प्रदान करें। आप देखेंगे कि कार्ड से मिलने के लिए कितने कार्ड इस आयोजन में मौजूद मिलेंगे। सिर्फ निमंत्रण कार्ड ही नहीं बल्कि जो पहली बार मिलेंगे वे अपने विजिटिंग कार्ड भी एक दूसरे को प्रदान करेंगे और जिनके पास विजिटिंग कार्ड नहीं होंगे वे अपने नंबर देंगे और लेंगे। इस प्रकार मिलन का यह सुनहरा अवसर आपको अवश्‍य ही एक  ऐसे से अवश्‍य मिलाएगा जिसे आप जिंदगी भर भुला नहीं पायेंगे। तो आप अपने कार्ड को अपने साथ इस आयोजन में लेकर चल रहे हैं न !

    मुझे मिलने के लिए यहां पर क्लिक करके जानिए  और मोबाइल नंबर पर बात कीजिए।

    2 टिप्‍पणियां:

    1. अविनाश जी, ये तो बतायें कि यह निमन्त्रण कार्ड मिलते कैसे हैं...

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    2. @ भारतीय नागरिक

      डाक से भी मिलते हैं
      और कोई लेकर आ भी सकता है कार्ड।

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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