गगनांचल के अंदर क्‍या है : एक आंचल में इतना गगन समाया कैसे : जानना चाहते हैं

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • आइये जानते हैं
    गगनांचल क्‍या है
    भीतर क्‍या है
    बाहर तो दिखला दिया है
    आवरण मनीष वर्मा का रचा है

    प्रवासी साहित्‍य के पक्ष-विपक्ष पर पेश है प्रस्‍तुति
    लालित्‍य ललित की, आंक रहे हैं
    कितना है प्रवासी और कितना है साहित्‍य
    विचार हैं सम्मिलित इसमें
    राजेंद्र यादव के
    वे कहते हैं द्विवेदीयुगीन लेखन से आगे नहीं

    चित्रा मुद्गल का कहना है
    सृजनात्‍मकता स्‍वयं बोलती है
    हिमांशु जोशी बतला रहे हैं
    पानी को फीते से नहीं नाप सकते
    रमणिका गुप्‍ता निराश दिखती हैं
    कुछ ज्‍यादा सकून नहीं मिला
    अजित कुमार, गंगाप्रसाद विमल,प्रो. रामशरण जोशी 
    डॉ. रत्‍नाकर पाण्‍डेय, रामदरश मिश्र बतला रहे हैं जो
    अंक लेकर पढ़ेंगे सब आनंद आएगा अद्भुत आएगी ग्‍लो।

    कन्‍हैयालाल नंदन जी अविस्‍मरणीय में मान दे रहे हैं
    भूल नहीं सकता, प्‍यारे लाल त्रिपाठी को
    आप भी पढि़ए  इस मार्मिक संस्‍मरण को।


    व्‍यक्तित्‍व में सन 2009 के साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार से सम्‍मानित
    कवि कैलाश वाजपेयी का जीवन और उनकी काव्‍य रचनाएं और
    उनके वे अनमोल विचार जो हेमंत कुकरेती से बातचीत में निकले
    व्‍यक्तित्‍व में ही अप्रतिम रचनाकार सत्‍येन्‍द्र श्रीवास्‍तव जी के रचनाकर्म के बारे में
    अनिल जोशी बतला रहे हैं, कविताएं उनकी भी पढ़वा रहे हैं

    शशिप्रभा तिवारी ने पेश की है
    कुचिपुड़ी नृत्‍य की जुगलबंदी : जयराम राव एवं वनश्री राव
    की जानकारी जिन्‍होंने कुचिपुड़ी को अंतरराष्‍ट्रीय क्षितिज पर
    नई पहचान दिलाई है।

    इसमें मोती भी हैं
    प्रथम दिवसे में निर्मला जैन बतला रही हैं
    जीवन में पहला प्‍यार, पहला भ्रष्‍टाचार या पहली नौकरी
    इन्‍हें नहीं भूल सकते कभी, या वे ही भूलने नहीं देते।

    साहित्‍य चिंतन में नित्‍यानंद तिवारी
    प्रेमचंद और हमारा समय पर विचारोत्‍तेजक आलेख लाए हैं।

    कथा साहित्‍य में संजीव की खबर है
    खबर में खबर जुड़ती रही
    समय में जुड़ता रहा समय
    तुम बाल बच्‍चेदार हुई
    एक और समाचार हुई
    ..... अभी और है, यह तो शुरू का दौर है ।

    नरेन्‍द्र कोहली का एक मात्र सत्‍य
    उनके शीघ्र प्रकाश्‍य उपन्‍यास
    तोड़ो कारा तोड़ो-6 (समाहार) का एक अंश है।
    सुषम बेदी का अतीत के शब्‍द
    विष्‍णु नागर जी का अंत भला सो सब भला
    पर यह अंत नहीं शुरूआत है
    इसके आगे महेश दर्पण का तार है
    जॉर्ज ऑरवेल की मुर्गियों का विद्रोह है
    लघुकथा मंदिर है
    नवाब की हवेली है जो ज्ञानप्रकाश विवेक की झोली से ली है
    डॉ. योगेन्‍द्र नाथ शर्मा 'अरुण' की बाबा की बेटी
    गोपाल चतुर्वेदी का कोई मैं झूठ बोलया में
    एन.आर.आई. का महत्‍व है
    इसके साथ ही दिविक रमेश, लक्ष्‍मीशंकर वाजपेयी, रामबहादुर चौधरी 'चंदन' 
    राधेश्‍याम तिवारी, प्रताप सहगल, जैकी श्राफ़ की काव्‍य रचनाएं हैं

    फिर बांध रहे हैं भूमिका अशोक चक्रधर
    कवि सम्‍मेलनों से हिंदी विदेशों में खु़श हुई
    हरजेन्‍द्र चौधरी का  प्रणाम निवेदन  प्रोफेसर कात्‍सुरो कोगा ।

    अभी है भाषा-चिंतन में विनोद संदलेश की रचना
    प्रयुक्ति की संकल्‍पना और अनुवाद
    नर्मदा प्रसाद उपाध्‍याय की कलम से कला चिंतन
    मुग़ल क़लम से निसर्ग उपादानों के अंकन
    अजित राय के नटरंग में
    बारहवां भारत रंग महोत्‍सव
    तेजेन्‍द्र शर्मा के निष्‍पक्ष विवरण
    सांस्‍कृतिक संवाद का पुल : यू.के. का नेहरू सेंटर
    देवेन्‍द्र राज अंकुर के अध्‍ययन कक्ष से
    दिल्‍ली की कहानी दिल्‍ली की जु़बानी
    (निर्मला जैन की पुस्‍तक दिल्‍ली शहर दर शहर)
    अनिल महेश्‍वरी का एक मंच पर लाने का प्रयास
    (विश्‍व हिंदी पत्रिका 2009)
    विजय विद्रोही कर रहे हैं समीक्षा
    महीप सिंह और मृदुला गर्ग के दो कहानी संग्रहों की
    गतिविधियां हैं यज्ञ शर्मा को व्‍यंग्‍यश्री सम्‍मान की
    और कनुप्रिया का मनोहारी नृत्‍य-नाट्य मंचन।

    जो दिया है विवरण वो पूरे वर्ष भर का नहीं है
    सिर्फ उस अंक का है आईना
    जिसका आवरण चित्र आप ऊपर देखकर आए हैं
    अगर आप इसे पूरा पढ़ने के इच्‍छुक हैं
    तो विश्‍वास मानिए, आप इसे लेकर पूरा ही पढ़ेंगे
    जानना चाहते हैं कि यह कहां मिलेगी
    कैसे पहुंचेगी तो संपर्क करें 011 23379639 पर

    एक राज खोलते हैं, अब जल्‍दी से बोलते हैं
    इसके  संपादक प्रेम जनमेजय कह रहे हैं दृष्टिकोण में
    यदि कुछ अच्‍छा लगे तो मानिएगा कि ये सबके रचनात्‍मक सहयोग का परिणाम है और यदि कुछ खराब लगे तो वह संपादक की अक्षमता के कारण होगा।
    कुछ अपरिहार्य कारणों से अंक के प्रकाशन में विलंब हुआ। प्रयत्‍न होगा कि भविष्‍य में ऐसा अवांछित वर्तमान न दोहराया जाए।

    18 टिप्‍पणियां:

    1. prem ji achchhe sampadak hai. nirmam bhi hai. unake maandandon me kharee n utarane valee rachanaaye ve rok dete hai, fir chaahe vo unkaalaakh chahetaa lekhak ho. yahi sampadakeey eemandaree unhe itanaa kushal banatee hai. ''gaganaanchal'' safal ho, yahi shubhkamanaa hai.

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    2. बढ़िया लगा जानकर गगनाण्चल के बारे में.

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    3. गगन के आँचल जैसा ही भरपूर ...जानकारी के लिए आभार ..!!

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    4. गगनांचल के विषय में विस्तार के जानकार बढ़िया लगा...सुंदर जानकारी के लिए धन्यवाद ..नमस्कार

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    5. .प्रस्तुतिकरण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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    6. gaganachal ka yah ank bahut achchha nikla hai. agar abhi tak aapne ise na padha ho to zaroor padhen. kuchh naya hasil hoga

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    7. बढ़िया लगा यह नया शब्द " गगनांचल " I think एक जमाने में लोग इसे यूरोप और अमेरिका के लिए इस्तेमाल करते होंगे !

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    8. दिलचस्‍पी जगाने के लिए आभारी हूं पर अंक कहां मिलेगा ?

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    9. इतने सारे, मशहूर नाम देखकर उनके विचार पढने की इच्छा हो रही है...बहुत ही संग्रहणीय अंक बन पड़ा है ...इसे कैसे मंगवाया जा सकता है?..कृपया जानकारी दें,

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    10. बढ़िया लगा जानकर गगनाण्चल के बारे में.

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    11. बढिया जानकारी.. पढ़ने की उत्सुकता जगा दी..पढ़ने के लिए कैसे जुटाया जाए.. यह भी बताइएगा.

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    12. 'गगनांचल' की जानकारी अन्तर्जाल के पाठकों में बांटने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अविनाश जी। 'गगनांचल' अब भाई प्रेम जनमेजय जी के हाथ में है, नि:संदेह अब इसका हर अंक जोरदार और जानदार होगा।

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    13. मैं तो इसकी नियमित पाठक हूँ अभी पिछले चार पांच महीने से नहीं उपलब्ध हो पाई है जानकारी के लिए शुक्रिया

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    14. मैं तो इसकी नियमित पाठक हूँ अभी पिछले चार पांच महीने से नहीं उपलब्ध हो पाई है जानकारी के लिए शुक्रिया

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    15. गगनांचल की सदस्‍यता की जानकारी के लिए गगनांचल की सदस्‍यता कैसे लें यहां पर क्लिक कीजिए।

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    16. गगनांचल एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका है एक समय था जब भवानी प्रसाद मिश्र जी इसके संपादक होते थे .प्रेम जन्मेजय निश्चित रूप से इसे गरिमा प्रदान करेंगे .प्रेम जन्मेजय जी को हार्दिक बधाई और अविनाश जी आप को इंटरनेट पर प्रचार के लिए धन्यवाद.

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
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