कांग्रेस का गरीबों को तोहफा

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    सेंट्रल स्कूल में बढेंगी एक लाख सीट


    (लिमटी खरे)

    नई दिल्ली 05 मई। केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना ''शिक्षा का अधिकार'' के लागू हो जाने के बाद अब सरकार ने घर से ही इसे अमली जामा पहनाना आरंभ कर दिया है। मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अधीन संचालित होने वाले केंद्रीय विद्यालयों में इस साल एक लाख सीट बढाने की योजना है। वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्रों की संख्या दल लाख तेंतीत हजार है, इस लिहाज से इसमें लगभग दो लाख साठ हजार सीट बढना था, पर इसके प्रथम चरण में दस लाख सीट बढाने पर विचार चल रहा है।

    केंद्रीय विद्यालय संगठन के सूत्रों का कहना है कि इस कार्ययोजना का मसौदा तैयार कर लिया गया है, इसी माह संगठन की गर्वनिंग बाडी की बैठक में इसे पेश किए जाने की पूरी तैयारी है। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद अब केंद्रीय विद्यालयों में भी पच्चीस फीसदी सीट गरीबों के बच्चों के लिए आरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार पहले वर्तमान संख्या में से ही इसे समाहित करने का प्रस्ताव आया था, जिसका विरोध होने पर उसे वापस लेकर सीट बढाने की बात पर सहमति बना ली गई।

    सूत्रों ने बताया कि आने वाले तीन सालों में पच्चीस फीसदी सीट का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। बढी हुई विद्यार्थियों की तादाद के बारे में सूत्रों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत पांचवी स्तर तक प्रतिकक्षा 35 तो पांचवीं से आठवीं तक 40 तो आठवीं के उपरांत इनकी संख्या 45 निर्धारित है। नई व्यवस्था में इसमें एकरूपता लाई जा सकती है, जिसके अनुसार प्रति कक्षा विद्यार्थियों की तादाद 45 कर दी जाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में केंद्रीय विद्यालयों की कक्षाओं में पर्याप्त स्थान है, जिसमें 45 बच्चे बैठ सकते हैं। नई व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    वैसे मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने केंद्रीय विद्यालयों से सांसदों का कोटा खत्म कर एक बहुत बडा कदम उठाया था। इससे सांसदों की नाराजगी भी उन्हें झेलनी पडी थी, पर सिब्बल अपनी जिद पर अडे रहे। 1200 सीटों का कोटा समाप्त हो जाने पर अब केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला आसान तो होगा किन्तु इसमें गैर नौकरीपेशा लोग जो केटेगरी सात में आते हैं वे आज भी अपने बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में नहीं पढा पाएंगे।
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    1 टिप्पणी:

    1. केन्द्रीय विद्यालयों की स्थित दयनीय है , कहीं भी पूरा स्टाफ नही है । प्रवेश मे मारामारी है । जो सेवारत नही है उनके बच्चे तो प्रवेश से कोसों दूर हैं ।

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