पर्वतों में रहने वाले 'मगन फिर चूमो शिखाएं'

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  • सुनील गज्जाणी
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  • स्वयं चार क़दम स्वतः चल नहीं पाने वाले व्यक्ति के सन्दर्भ में शायद अगर कोई  कहे कि ये व्यक्ति पर्वतों से प्रेम करने वाला तथा कई बार विश्व की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवेरेस्ट को फ़तेह अपने साहस के दम पे करने का प्रयास कर चुका है, सहसा यकीन नहीं होता कि अरे ! ये मगन बिस्सा हैं.
          
    मगन बिस्सा जी का नाम माउन्ट ट्रेनिग का राजस्थान में ही नहीं, पूरे भारत वर्ष में किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है. जिन्होंने सर्वप्रथम एवेरेस्ट फ़तेह का प्रयास 'सुश्री बछेन्द्रीपाल' के साथ ही किया था. जब वे पहली भारतीय एवेरेस्ट फ़तेह महिला बनी थी, खैर ये भाग्य की बात है कि जब भी उन्होंने एवेरेस्ट की शिखा को चूमने से कुछ मीटर दूर रहते तभी उनका भाग्य उनसे रूठ जाता. मसलन एक बार अपने साथी की oxygen ख़त्म हो जाने पर स्वयं का सिलेंडर उसे दे दिया और वे इस अभाव में नहीं जा पाए तो एक बार चोटी पर से पाँव फिसलने से पाँव में फ्रेक्चर हो जाने के कारण स्वर्णिम गाथा नहीं लिख पाए, और ऐसा कई बार हुवा कि कोई ना कोई दुर्घटना घटती रही.
          
    देश-विदेश  के ऊंचे-ऊंचे पर्वतों, चिकनी चट्टानों पे अठखेलियाँ करने वाले हँसते-हँसते उनके सीने पे चढ़ भारतीय पताका फहराने वाले बीसा जी अपने पेट की आँतों की समस्यों से दो-दो हाथ कर रहे हैं.
          
    मगन जी पिछले कई महीनो से दिल्ली में अपना इलाज़ करा कर हाल ही में बीकानेर लौटे हैं. जो-जो अंत ख़राब लगी, ऑपरेशन से उसे काट दिया है. फौलादी शख्स हजारों मीटर की कहत्तानो, पहाड़ों से सिमट कर चंद फुट के ऊंचे पलंग को मात्र आश्रय बना लिया फौलादी इरादों वाला सिमट गया कमरे तक.
          
    मेरा परम सौभाग्य है कि उनके सानिध्य में मैंने माउन्ट आबू में Rock climbing का  बेसिक कोर्स किया. सह्रदय  मगन जी जानने का अवसर मिला. कठोर पत्थरों को चीरनेवाले का ह्रदय बेहद कोमल देखा.
          
    अदम्य साहस वाले कार्य बिस्सा जी का पूरा परिवार समर्पित है. धर्मपत्नी डॉसुषमा बिस्सा भी कठोर चट्टानों को अपने ममतामई हाथों से मोम सा बना देती हैं.
          
    प्रार्थना है कि मगन जी शीघ्र स्वस्थ हों, फिर शिखाओं को चूमे. अंत में यही कहूँगा
    "लांघने हैं ऊंचे पर्वत
    नापनी हैं दूरिया
    गर ठहर गए तुम
    क्या कहेगी वादियाँ"
    ****************

    4 टिप्‍पणियां:

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    2. Dear Writer.. i am very thankful for you if you have share your inner pain and hope about Maghan Bisaa with me.
      i can say after read your text mr. Bisaa is a real TIGER of INDIA and at present his condition is very painfull so i want to help to people of INDIA with this request "PLEASE CAEA OUR TIGER his name is MAGHAN BISAA...
      jai hind..
      yogendra kumar purohit
      M.F.A.
      BIKANER,INDIA

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    3. मगन बिस्सा बीकानेर या राजस्थान की ही नहीँ समूचे भारत की शान हैँ।वे उन विरले लौगोँ मेँ से जिन्होने दो चार बार नहीँ वरन् अनेक बार ऐवरेस्ट फतेह का प्रयास किया है।इनकी दरियादिली की बदौलत लौग ऐवरेस्ट फतेह कर पाए।आप ने अनेक पर्वतारोहियोँ को प्रशिक्षित किया जो बाद मेँ नामचीन पर्वतारोही बने।समूचे देश को उन पर नाज है।आज वह टाईगर असाध्यबीमारी से जूझ रहा है।नैतिकता यही कहती है कि देश का हर नागरिक आज उनकी मदद करे! भाई सुनील गज़ाणी को इस पोस्ट के लिए बधाई!

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    4. सभी ब्लागर्स को अपने अपने ब्लाग पर मगन बिस्सा की मदद के लिए अपील लगानी चाहिए!चाहेँ तो सुनील गज़ाणी जी अपनी लोकप्रिय वेब मैगजीन'आखर कलश' पर ऐसी अपील लगा कर पहल कर सकते हैँ।

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