शोध का विषय बनते जा रहे हैं सोरेन

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    विधानसभा और लोकसभा के बीच चमत्कार दिखा रहे हैं सोरेन

    शोध का विषय बनते जा रहे हैं सोरेन

    सोरेन पर चलना चाहिए चार सौ बीसी का मामला

    (लिमटी खरे)

    नई दिल्ली 06 मई। झारखण्ड की सत्ता पर काबिज होने वाले शिबू सोरेन का व्यक्तित्व अब विद्यार्थियों के लिए शोध का विषय बनता जा रहा है। आने वाले समय में उनके उपर शोध होने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। झारखण्ड के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद संसद सदस्य शिबू सोरेन ने लोकसभा में महज एक ही दिन अपनी शक्ल दिखाई है, पर राज्य की सरकार वे पूरी मुस्तैदी से चला रहे हैं।

    दांव पेंच में माहिर शिबू सोरेन ने बीमारी का कारण बताकर लोकसभाध्यक्ष से अवकाश मांगा है। सदन के नियमों के अनुसार लोकसभा या राज्य सभा के सदस्य को बाकायदा लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से अनुपस्थित रहने पर अनुमति की दरकार होती है। यह अनुमति अवकाश के पहले या बाद में ली जा सकती है। इसी क्रम में शिबू सोरेन ने 13 अप्रेल को आवेदन देकर 19 दिसंबर 2009 से 21 दिसंबर 2009 तथा 22 फरवरी 2010 से 16 मार्च तक का अवकाश मांगा था। शिबू की अब तक की 56 दिन की छुट्टी को मंजूरी दी जा चुकी है।

    बजट सत्र के दूसरे अंश में 15 अप्रेल से 07 मई तक वे फिर सदन से बंक मार गए। इस दौरान भाजपा के कटौती प्रस्ताव के वोटिंग के दिन  अलबत्ता वे सदन में उपस्थित हुए थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा की बैसाखी पर झारखण्ड में सरकार चलाने के बावजूद भाजपा के खिलाफ ही मताधिकार का प्रयोग कर सबको चौंका दिया था। बस यही टर्निंग प्वाईंट साबित हुआ सोरेन के लिए। भाजपा ने उनसे समर्थन वापस ले लिया।

    जिस तरह स्कूल कालेज में विद्यार्थी बीमारी का बहाना कर आवेदन देकर अवकाश लिया करते हैं, फिर अपने साथियों के साथ मौज मस्ती करते हैं, लगता है गुरूजी की स्कूल कालेज की यादें अभी ताजा हैं। गुरूजी भी उसी तर्ज पर झारखण्ड में अपनी सरकार चला रहे हैं। सबसे अधिक आश्चर्य का विषय तो यह है कि देश की सबसे बडी पंचायत लोकसभा में किसी भी जिम्मेदार पदाधिकारी या संसद सदस्य को अब तक यह नहीं सूझा की जो व्यक्ति बीमार है, वह आखिर बीमारी की हालत में मुख्यमंत्री की शपथ लेकर राज्य की विधान सभा या अपने सचिवालय अथवा कार्यालय में बैठकर सूबे का शासन किस तरह चला सकता है। देखा जाए तो सोरेन पर चार सौ बीसी का मामला चलाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपनी बीमारी की वजह से लोकसभा से तो अवकाश लिया है पर राज्य की सरकार चला रहे हैं। यह कैसे हो सकता है कि एक व्यक्ति एक जगह बीमार हो और दूसरी जगह काम पर मुस्तैद हो। हो भी सकता है यह चमत्कार सिर्फ और सिर्फ शिबू सोरेन जैसा चालाक राजनेता ही कर सकता है।

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    1 टिप्पणी:

    1. महोदय ,
      राजनीती में आए सभी लोग इतने सरल नहीं होते जितने दिखाई देते है |वे विभिन्न प्रकार के मुखोटों का
      उपयोग समय समय पर करते रहते है |इस लिए
      न तो आदर्श हो सकते हैं न ही उनकी करनी और कथनी पर विश्वास किया जाना चाहिए |
      आशा

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