शिव पढ रहे हैं भागवत पुराण

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    उमा की वापसी हुई मुश्किल

    सुरेश, प्रभात, शिव के त्रिफला की भूमिका पर संघ में चर्चा

    (लिमटी खरे)

    नई दिल्ली 01 मई। मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों भागवत पुराण पढने में व्यस्त हैं। दरअसल सूबे की पूर्व मुख्यमन्त्री उमा भारती की घरवापसी से बुरी तरह भयाक्रान्त नज़र आ रहे हैं शिवराज सिंह चौहान, यही कारण है कि जब भी उमा की भाजपा में वापसी की खबरें जोर पकडती हैं, शिवराज सिंह का नाम उनके प्रबल विरोध के लिए सामने आ जाता है। अब जबकि कल 02 मई को मध्य प्रदेश भाजपाध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है के बीच ही शिवराज सिह चौहान ने संघ मुख्यालय नागपुर में जाकर मत्था टेका है।

    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सूत्रों ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ लंबी बातचीत की। सूत्रों ने संकेत दिए कि बातचीत का विषय मूलत: तीन बातों पर ी केन्द्रित था पहला मुद्दा था उमा भारती की घर वापसी, दूसरा भाजपा के संभावित सूबाई अध्यक्ष प्रभात झा एवं सुरेश सोनीकी भूमिका और मध्य प्रदेश के मन्त्री कैलाश विजयवर्गीय का विवाद। इसके अलावा संगठन और सत्ता के बारे में भी औपचारिक चर्चाएं हुईं हैं।

    दिल्ली में झण्डेवालान स्थित संघ मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि फायर ब्राण्ड नेत्री रहीं उमा भारती ने चार दिन पूर्व मोहन भागवत से भेंट की थी। जैसे ही इसकी भनक शिवराज सिंह चौहान को लगी उन्होंने भी भागवत से समय मांग लिया। गौरतलब है कि उमा भारती की वापसी का भाजपा के अन्दर ही दो तीन लाबियां विरोध कर रहीं हैं। अनेक नेताओं का मानना है कि उमा भारती की वापसी से भाजपा का अन्दरूनी माहौल बुरी तरह प्रदूषित हो जाएगा, क्योंकि उमा के जाने के बाद उमा के विश्वस्तों ने उनका साथ छोड दिया था, अब नेताओं को आशंका है कि अगर उमा भारती वापस आईं तो वे इन निष्ठा बदलने वालों को चुन चुनकर नेस्तनाबूत करने का प्रयास अवश्य ही करेंगी। उधर भाजपा में चल रही बयार के अनुसार भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी को उमा भारती को वापस लेने में कोई समस्या नहीं है, पर वे कोई भी काम आम सहमति से ही अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। आडवाणी मण्डली इस फिराक में है कि उमा भारती को किसी भी कीमत पर भाजपा में वापस ले लिया जाए, ताकि सुषमा स्वराज के बढते कदमों को थामा जा सके।

    संघ के सूत्रों ने बताया कि शिव और भागवत के बीच हुई चर्चा में सुरेश सोनी और प्रभात झा की भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रभात झा को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनवाने के लिए सुरेश सोनी ने अपने सारे घोडे खोल दिए हैं। मध्य प्रदेश इकाई की एक लाबी प्रभात झा के नाम का विरोध कर रही है, पर प्रभात झा और सुरेश सोनी की जुगलबन्दी के चलते उनके विरोधियों के मंसूबे परवान नहीं चढ पा रहे हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के एक मन्त्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम भ्रष्टाचार में लवरेज होने के बाद संघ नेतृत्व की भवें तन गईं हैं। बताते हैं कि दिल्ली की एक दुकान में नोट गिनने की एक मशीन की खरीद के वक्त सीसीटीवी के फुटेज में शिवराज के बहुत अजीज का फुटेज आने की सीडी विजयवर्गीय के पास है, और उसी के चलते वे शिवराज सिंह पर दवाब बनाते रहते हैं, पर इस बार बांस उल्टे बरेली के ही पडते नज़र आ रहे हैं।

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