आओ चलते हैं आगरा : फिर मिलते हैं ब्‍लॉगर बंधुओं से - संभव हो तो इस कार्यक्रम में शामिल हों (अविनाश वाचस्‍पति)

Posted on
  • by
  • अविनाश वाचस्पति
  • in
  • Labels: , ,
  • सोच रहा हूं
    इस कार्यक्रम में
    कैसे पहुंचूं
    मिल गया है हल
    मन से पहुंचूंगा
    और मानस में
    करूंगा महसूस
    पर आप अवश्
    हाजिर होना।



    आगरा ही नहीं हिंदी जगत की प्रतिष्ठित संस्था आनंद मंगलम सा तत्वावधान में १४ मई २०१० को माथुर वैश्य सभा भवन आगरा पर अखिल भारतीय कवि सम्मलेन और डॉक्टर राय एवं व डाक्टर रंजन, डॉक्टर परिहार का सम्मान किया जायेगा। यह जानकारी पूरा पढ़ने और शुभकामनाएं देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए

    3 टिप्‍पणियां:

    1. ????? ??????
      to avinashvachaspati@gmail.com
      date Fri, May 14, 2010 at 10:06 AM
      subject नुक्कड़ : आओ चलते हैं आगरा : फिर मिलते हैं ब्‍लॉगर बंधुओं से - संभव हो तो इस ...
      mailed-by blogger.bounces.google.com

      hide details 10:06 AM (3 minutes ago)

      प्रेम जनमेजय ने आपको एक ब्लॉग का लिंक भेजा है:

      सब चलना चाहते हैं,
      पर चल नहीं सकते
      मिलाना जुलना अच्छा लगता है
      यह तरकीब अच्छी है
      मैं भी पहुँचता हूँ मन से वहां
      ब्लॉगर मित्र एकत्रित हैं जहाँ

      अविनाश जी आपने अपने कविता virus का असर देखा मैं भी कविता की भाषा में ब्लोगिआने लगा

      ब्लॉग: नुक्कड़
      भेजें: आओ चलते हैं आगरा : फिर मिलते हैं ब्‍लॉगर बंधुओं से - संभव हो तो इस कार्यक्रम में शामिल हों (अविनाश वाचस्‍पति)
      लिंक: http://nukkadh.blogspot.com/2010/05/blog-post_14.html

      डॉ. परिहार के विचार बिगुल में टिप्‍पणी करने के आड़े आ रही अंग्रेजी वर्ड वेरीफिकेशन के चलते नुक्‍कड़ पर टिप्‍पणियां इस पोस्‍ट पर खोली जा रही हैं, और डॉक्‍टर साहब से अनुरोध है कि हिन्‍दी टिप्‍पणियों के मार्ग में आ रही अंग्रेजी वर्ड वेरीफिकेशन की बाधा हटाएंगे तो अच्‍छा लगेगा।

      उत्तर देंहटाएं
    2. from Dr. Prem Janmejai
      sender-time Sent at 10:09 AM (GMT+05:30). Current time there: 10:33 AM. ✆
      to अविनाश वाचस्पति ,
      अविनाश वाचस्पति
      date Fri, May 14, 2010 at 10:09 AM
      subject /
      mailed-by gmail.com
      signed-by gmail.com

      hide details 10:09 AM (24 minutes ago)

      सब चलना चाहते हैं, पर चल नहीं सकते
      मिलाना जुलना अच्छा लगता है
      यह तरकीब अच्छी है
      मैं भी पहुँचता हूँ मन से वहां
      ब्लॉगर मित्र एकत्रित हैं जहाँ
      अविनाश जी
      आपने अपने कविता virus का असर देखा
      मैं भी कविता की भाषा में ब्लोगिआने लगा
      Dr. Prem Janmejai

      उत्तर देंहटाएं
    3. 14 मई को नहीं पहुंच सकी तो कोई बात नहीं ,
      19 या 20 मई को जरूर पहुंचुंगी मैं आगरा ,
      शायद ठीक ही हुआ कि मैं आज 14 मई को नहीं गई , शायद रायजी व परिहार जी से मुलाकात नहीं हो पाती ।

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz