चिदम्बरम के बाद रमन हैं राजा के निशाने पर

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    रमन और दिग्विजय आमने सामने

     
    (लिमटी खरे)

     
    नई दिल्ली 04 मई। नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम को कोसने के बाद अब छत्तीसगढ के मुख्य मंत्री रमन सिंह और संयुक्त मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तथा वर्तमान में कांग्रेस के सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के बीच नक्सलवाद को लेकर तकरार तेज हो गई है। दोनों ही नेता एक दूसरे को कटघरे में खडा करने से अपने आप को पीछे नहीं रख रहे हैं।

     
    वैसे तो कांग्रेस की संस्कृति रही है कि पार्टी के अंदर की कोई भी बात पार्टी मंच पर ही उठाई जानी चाहिए। इससे उलट महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने जब कलम के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदंबरम को लानत मलानत भेजी तब कांग्रेस की कडाही मंे उबाल आने लगा था। बाद में साफ सफाई करवाकर और माफी मंगवाकर मामला शांत कराया गया। लोगों का कहना है कि अगर इस तरह की धृष्टता राजा दिग्विजय सिंह के अलावा अगर किसी और ने की होती तो अब तक उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता।

     
    इसके बाद दिग्विजय सिंह को छग के सीएम रमन सिंह ने बहुत बुरा कहा। इससे कुपित होकर राजा दिग्विजय सिंह ने रमन सिंह पर दस सवाल दाग दिए। एसा लगता है कि दोनों सिंहों के बीच चल रही इस लडाई का काई अंत नहीं है, दोनों ही एक दूसरे के कपडे उतारने पर उतरू नजर आ रहे हैं। रमन सिंह ने अपने आलेख में राजा दिग्विजय सिंह को आडे हाथों लिया। रमन का कहना है कि राजा दिग्विजय सिंह दस साल तक अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे पर उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे के लिए कुछ नहीं किया।

     
    राजा को रमन की बात दिल में लग गई। राजा दिग्विजय सिंह ने भावुक होकर रमन सिंह को पत्र लिख मारा। राजा दिग्विजय सिंह का पत्र में कहना है कि रमन सिंह के लेख की भाषा से उन्हें दुख पहुंचा है। राजा दिग्विजय सिंह का मानना है कि नक्सल प्रभावित इलाके के लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए यह आवश्यक है कि उनका विश्वास शासन के प्रति जगाया जाए। महेंद्र कर्मा के नेतृत्व में आरंभ किए गए सलवा जुडूम आरंभ हुआ किन्तु गलत नीतियों के चलते हजारांे आदिवासी अपने ही क्षेत्रों में शरणाथी बनकर रह गए हैं। राजा दिग्विजय सिंह ने रमन सिंह को कोसते हुए कहा कि उनके शासनकाल में दंतेवाडा में एक हजार से ज्यादा नक्सली जुडते हैं और राज्य की गुप्तचर एजेंसी को पता न चले एसा संभव ही नहीं है। इसका प्रतिकार करते हुए रमन सिंह कहते हैं कि नक्सल समस्या के मामले में राजा दिग्विजय सिंह पूरी तरह दिग्भ्रमित ही नजर आ रहे हैं। उन्होने राजा दिग्विजय सिंह इस मामले में जहां चाहे वहां बहस की चुनौति भी दे दी है।

     
    वैसे न तो पी.चिदम्बरम और न ही रमन सिंह ने राजा दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में मध्य प्रदेश में हुई गंभीर घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। गौरतलब है कि राजा दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में उनके ही मंत्रीमण्डल के परिवहन मंत्री लिखीराम कांवरे को बालाघाट जिले में ही उनके घर पर आधी रात को नक्सलियों ने बुरी तरह गला रेतकर मौत के घाट उतार दिया था, यह घटना अपने आप में बहुत बडी थी। इतना ही नहीं बालाघाट जिले में ही एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बंसल और उप निरीक्षक ठाकुर को भी नक्सलियों ने मार डाला था। रही बात सिपाहियों की तो उप निरीक्षक प्रकाश कतलम की अगवानी में सर्च पार्टी के सोलह जवानों की जीप उडा दी गई थी। इसके अलावा न जाने कितने जाबांज सिपाहियों को अपनी जान गंवानी पडी थी। अगर राजा दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके मंत्रीमण्डल के सहयोगी और पुलिस के जवान ही सुरक्षित नहीं थे, तो आज किस हक से वे उसी नक्सल समस्या के बारे में किसी को शक के कटघरे में खडा करने का माद्दा रख रहे हैं।

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