उमा नहीं तो भाजपा के गांधी कूदेंगे राहुल के खिलाफ

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    युवाओं के मोहभंग के खतरे से खौफजदा है नेतृत्व

    वरूण की अधिक से अधिक सभाएं कराने का प्रयास

    (लिमटी खरे)

    नई दिल्ली 30 अप्रेल। भारतीय जनता पार्टी से नाता तोडकर भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाकर उसके अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने वाली उमा भारती की भाजपा में वापसी की राह बहुत ही कटीली नज़र आ रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उमा की वापसी के मार्ग प्रशस्त होने तक भाजपा के गांधी (वरूण गांधी) को कांग्रेस के गांधी (राहुल गांधी) के खिलाफ मैदान में उतारने की रणनीति पर काम आरम्भ कर दिया है। भाजपा अध्यक्ष के करीबी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को डर सता रहा है कि कहीं कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के मोह में फंसकर उत्तर प्रदेश के युवा भाजपा से किनारा न कर लें।

    वैसे भी भाजपा का पूरा ध्यान अब उत्तर प्रदेश की ओर केन्द्रित होकर रह गया है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा अपनी खोई साख फिर से वापस पा ले। यही कारण है कि नेतृत्व द्वारा उमा भारती, कल्याण सिंह के अभाव में राहुल गांधी की वैकल्पिक काट के तौर पर वरूण गांधी को आगे कर दिया है। वरूण गांधी के भाषणों में हिन्दुत्व को लेकर जो तल्ख तेवर संघ ने देखे हैं, वह चाहता है कि उत्तर प्रदेश में वरूण का भरपूर उपयोग कर युवाओं को भाजपा के और करीब लाया जाए।

    गौरतलब है कि दिसम्बर से अब तक यूपी में वरूण गांधी की तीन सभाएं करवाई जा चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में वरूण गांधी को युवा, उर्जावान स्टार प्रचारक के तौर पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। अगामी दो मई को वरूण की एक सभा जौनपुर के सुजानगंज तो जल्द ही अलीगढ के सिकन्दराराउ में कराने की तैयारी चल रही है। वहीं खबर है कि अनेक नेता अब वरूण गांधी की सभाएं अपने अपने क्षेत्र में करवाने के लिए प्रयासरत हैं। वरूण गांधी के पास से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो उनके राजनैतिक गुरू के तौर पर वे अपनी मां मेनका गांधी का पूरा सम्मान करते हैं, और उन्ही की रणनीति पर वे आगे बढ रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे भी उत्तर प्रदेश को लेकर खासे चिन्तित नज़र आ रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश की सियासत में चल पडी बयार ने कांग्रेस के प्रबंधकों की पेशानी पर पसीने की बून्दे छलका दी हैं। यूपी के भाजपाई चाहते हैं कि वरूण गांधी को यूपी में बतौर मुख्यमन्त्री प्रोजेक्ट किया जाना चाहिए, इससे युवाओं में अच्छा मैसेज जाएगा। यह सच है कि उत्तर प्रदेश की जनता पुराने चेहरों से उब चुकी है, और वह नया चेहरा देखना चाह रही है। यही कारण है कि पिछले लोकसभा चुनावों के उपरान्त वरूण गांधी एकाएक स्टार प्रचारक बनकर उभरे थे, सूबे में उनकी डिमाण्ड अन्य किसी भी नेता से बहुत ज्यादा थी।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्यों के बीच चल रही चर्चाओं में भी वरूण गांधी को प्रदेश के हर इलाके में जाने की बात कही जा रही है। गोण्डा, बहराइच, आजमगढ, बनारस, सीतापुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर आदि इलाकों से तो वरूण की सभाओं की मांग जबर्दस्त तरीके से आ चुकी है। विधायक तो यहां तक कह रहे हैं कि अगर उनकी सीट बरकार रहेगी तो सिर्फ और सिर्फ वरूण गांधी की सभाओं के चलते। अनेक विधायक तो वरूण गांधी को तारणहार के तौर पर देख रहे हैं।

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