परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 में से जीशान जैदी की पोस्‍ट जनसत्‍ता में प्रकाशित हुई है







क्या हम अपना भविष्य देख सकते हैं?

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या खूब लिखा है जीशान भाई. बहुत खूब! जनसत्ता में लेख छपने की बहुत-बहुत बधाई!

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