सिवनी जिला थर्ड ग्रेड के शहरों में शामिल!

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    मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियां 1 अप्रेल से बन्द करेंगी ब्राडबेण्ड सुविधा

    बीएसएनएल की चलेगी मोनोपल्ली

    फोरलेन के चलते आईं हैं मोबाईल कंपनियां

    (लिमटी खरे)

    सिवनी 31 मार्च। आईडिया, रिलायंस, एयरटेल, टाटा आदि जैसी नामी गिरामी कंपनियों ने राजस्व के मामले में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले को थर्ड ग्रेड (सी ग्रेड) के जिलों की सूची में सिवनी जिले को शामिल कर दिया है। 1 अप्रेल से सिवनी में मोबाईल के क्षेत्र में निजी सेवा प्रदाता कंपनियों ने इस जिले में ब्राड बेण्ड की सुविधा अवरूद्ध करने का निर्णय लिया है। एक अप्रेल के उपरान्त जिले में इंटरनेट की ब्राड बेण्ड सेवा सिर्फ और सिर्फ भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा ही निबाZध रूप से प्रदाय की जाएगी।

    गौरतबल है कि 2003 के उपरान्त सिवनी जिले में बीएसएनएल के अलावा शेष मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने एकाएक निवेश करना आरम्भ कर दिया था। रिलायंस, टाटा, आईडिया, एयरटेल आदि मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने सिवनी जिले में आमद दी और उपभोक्ताओं को नेटवर्क देने की गरज से यहां अपने अपने मोबाईल टावर और रिटेल आउटलेट स्थापित करना आरम्भ किए। जिले में एकाएक लोगों का मोबाईल प्रेम जागा। आलम यह है कि अब कमोबेश हर हाथ में एक मोबाईल और आधे से ज्यादा लोगों के पास दो से अधिक मोबाईल दिख ही जाते हैं।

    सिवनीवासी आश्चर्यचकित थे कि आखिर मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों को क्या सूझी कि वे बिना किसी सर्वे के ही सिवनी में आकर कूद गईं। रिलायंस कंपनी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों को सिवनी से कोई विशेष लगाव या दिलचस्पी नहीं है, दरअसल सिवनी का यह सौभाग्य है कि यह स्विर्णम चतुभुZज के उत्तर दक्षिण गलियारे पर अवस्थित है। चूंकि कंपनियों को चतुभुZज और इसके अंगों पर निबाZध तौर पर मोबाईल सेवा उपलब्ध कराना है, इसीलिए सिवनी में नामी गिरामी मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा अपना नेटवर्क उपलब्ध कराया गया है। एक पन्थ दो काज की दृष्टि से कंपनियों ने यहां इंटनेट सुविधा भी मुहैया करवाई थी। बाद में राजस्व के नज़रिए से उन्हें घाटा दिखाई पडने लगा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनियों को सिवनी जिले से वांछित राजस्व न मिल पाने से क्षुब्ध होकर इन कंपनियों ने सिवनी जिला वासियों को सबक सिखाने की सोची है। सम्भवत: यही कारण है कि इन सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा पूर्व में इंटरनेट सुविधा, फिर हाई स्पीड और अब ब्राडबेण्ड सुविधा प्रदान की गई है, जिसमें से ब्राड बेण्ड सुविधा को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

    उधर दूसरी और जिलावासियों ने इन कंपनियों को हाथों हाथ इसलिए भी लिया था क्योंकि बीएसएनएल का नेटवर्क सदा ही माशाअल्लाह मिलता था। लोग तो यहां तक कहने लगे थे कि बीएसएनल का तातपर्य ``भीतर से नहीं लगता`` या ``भूले से नहीं लगता`` हो गया है। आज भी आलम यह है कि शहर के अन्दर ही अगर आमने सामने बैठकर एक दूसरे का बीएसएनएल का नंबर मिलाया जाए तो आउट ऑफ कवरेज एरिया का टेप सुनाई पड जाता है। जबलपुर रोड पर स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यलय में तो इसका नेटवर्क भूले से नहीं मिल पाता है। अब इन कंपनियों के ब्राडबेण्ड के क्षेत्र में मैदान से हटने के उपरान्त अब बीएसएनएल के ब्राडबेण्ड के अकेले रह जाने से उसकी मोनोपल्ली बढने की संभावना बढ गई है। इन परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को गुणवत्ता के साथ सेवाएं मिल पाएं इसमें शंका ही नज़र आ रही है।

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