भूतल परिवहन मन्त्रालय के ठेकेदार का एक और कारनामा

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  • कैसे लगी सेफ्टी वेन में आग
    भूतल परिवहन मन्त्रालय के ठेकेदार का एक और कारनामा
    फोरलेन निर्माण कंपनी `सद्भाव` का वाहन जलकर खाक
    नहीं ली थी थिनर के परिवहन की अनुमति!
    (लिमटी खरे)

    सिवनी 28 मार्च। पाश्र्च में ढकेल दिए गए और कभी भाजपा के चेहरे रहे अटल बिहारी बाजपेयी सरकार की महात्वाकांक्षी स्विर्णम चतुZभुज परियोजना के अंग और वर्तमान में विवादस्पद हुए उत्तर दक्षिण गलियारे का निर्माण करा रही गुजरात मूल की कंपनी सद्भाव की सेफ्टी वेन 27 मार्च को अपरान्ह उसके बेस केम्प बटवानी में धू धू कर जल उठी। इस वेन में लगभग बीस बैरल थिनर रखा हुआ था।
    गौरतलब है कि गुजरात मूल की सद्भाव कंपनी द्वारा उत्तर दक्षिण फोर लेन गलियारे के सिवनी से लेकर खवासा तक के मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि सिवनी जिले की पश्चिमी सीमा से लगे छिन्दवाडा जिले का प्रतिनिधित्व केन्द्रीय भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ द्वारा किया जाता है। सिवनी जिले सहित महाकौशल को कमल नाथ की कर्मभूमि ही माना जाता है।
    प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार 27 मार्च को सद्भाव कंपनी का 20 बेरल थिनर गुजरात के सूरत से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से सिवनी पहुंचा था। इस थिनर को जिला मुख्यालय सिवनी से दक्षिण दिशा में लगभग 10 किलोमीटर दूर कंपनी के बेस केम्प बटवानी तक पहुंचाने के लिए इस सेफ्टी वेन का उपयोग किया गया था। अपरान्ह जैसे ही सेफ्टी वेन थिनर के कंटेनर लेकर बेस केम्प पहुंची अचानक ही उसमें आग लग गई और वह धू धू कर जल उठी। चन्द मिनिटों में ही सेफ्टी वेन जलकर खाक हो गई।
    यह तो अच्छा हुआ कि यह हादसा शहर के अन्दर नहीं हुआ अन्यथा किसी बडी घटना के घटने से इंकार नहीं किया जा सकता था। इस सेफ्टी वेन में आग कैसे लगी इसके कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। चूंकि वाहन में चालक या अन्य कोई कर्मचारी उस वक्त नहीं था, इसलिए आग के लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। कंपनी के सूत्र इस हादसे का कारण वेन में शार्ट सिर्कट होना बता रहे हैं। कंपनी ने बदनामी से बचने के लिए आनन फानन मामले को रफा दफा कर दिया है।
    सवाल यह उठता है कि कंपनी द्वारा अगर इतनी अधिक मात्रा में थिनर जैसे ज्वलनशील पदार्थ का परिवहन किया जा रहा था तो उसे बाकायदा सम्बंधित विभाग से ज्वलनशील पदार्थ के परिवहन की अनुज्ञा लेना चाहिए थी। बताते हैं कि कंपनी ने एसा कोई भी लाईसेंस नहीं लिया गया था। वैसे भी जिले में फोरलेन के निर्माण में लगी सद्भाव और मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा की जा रही अनियमितताओं के बारे में बार बार चेतान के बाद भी शासन प्रसासन के कानों में जूं न रेंगना, किसी अन्य निहित स्वार्थ की ओर इशारा करने के लिए काफी कहा जा सकता है।

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