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मंगलवार, ९ फरवरी २०१०

डॉक्‍टरी का कोर्स करके कै कंपाउंडर बनेगा --- (डॉ. टी एस दराल)


दिल्ली ब्लॉगर मिलन की झलकियाँ याद करते हुए , आइये आपको भी सुना देते हैं ये दास्ताँ ।
बात उन दिनों की है जब मैं एम बी बी एस कर रहा था । एक दिन हरियाणा के एक गाँव चला गया, एक शादी में ।
हलवाई की कढाई पर सब बुजुर्ग बैठे हुक्का पी रहे थे। मैंने जाकर राम राम करी।
तो एक ताऊ बोला --राम राम भाई छोरे। आज्या , और सुना कौन सी क्लास में पढ़े सै।

मैंने सोचा --इनको एम बी बी एस का मतलब तो क्या समझ आएगा । सो कहा --ताऊ मैं डॉक्‍टरी का कोर्स कर रहा हूँ।
ताऊ बोला --भाई कोर्स वोर्स तै ठीक सै, पर न्यू बता , कितनी ज़मात पढ्या ।
मैंने कहा -बस ताऊ यूँ समझ लो क‍ि बारहवीं पास कर के दाखिला लिया था।
भाई , बस बारा ही पढ्या --अरै थोडा ए पढ्या । अरै भाई कम तै कम १४ पढ़ कै बी ए पास तै करनी चाहिए थी।
मैंने कहा ताऊ, बस ये दाखिला मिल गया तो ---।
ताऊ --न भाई न , मज़ा कोन्या आया , अरै बी ए पास करता तै पटवारी बनता , डी सी बनता ।
यो डॉक्टरी का कोर्स करके के कम्‍पाउंडर बनेगा।

10 टिप्पणियाँ:

राजीव तनेजा ने कहा…

बढ़िया...मजेदार संस्मरण

परमजीत बाली ने कहा…

गाँव के बड़े बूढों की बात ही निराली है...मजेदार संस्मरण है..

AlbelaKhatri.com ने कहा…

aanand aa gaya sir !

jai ho........

दीपक 'मशाल' ने कहा…

Aisa bhi hota hai...

मनोज कुमार ने कहा…

संस्मरण मज़ेदार है।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत मजेदार संस्‍मरण है !!

वाणी गीत ने कहा…

रोचक संस्मरण ....!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

सुंदर हास्य!
अब तो लोग कंपाउंडरी का कोर्स कर के डाक्टर हुए जा रहे हैं।

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

गाँव में कलेक्‍टर पहुंच गया, एक बूढी माँ ने आशीर्वाद दिया कि बेटा भगवान तुझे पटवारी बनाए।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हा हा हा ! दिनेश जी और अजित जी , बढ़िया कमेंट्स !

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