लड़किया पतंग उडाती है

Posted on
  • by
  • Hari Sharma
  • in
  • Labels: ,


  • लडकियां उडाती हैं पतंगे
    लेकिन चरखी कोई और पकड़ता है
    वो डोर पकड़ती है
    पतंग को छुट्टी कोई और देता है


    वो पतंग तो उडाती हैं
    तंग कोई और ही बांधता है
    या वो उडाती हैं
    पतंगे जो कटके छत पे आती हैं


    उनकी पतंग उडती भी है
    आकाश में लेकिन
    घरवाले आगाह करते हैं
    पेच ना लड़ाने की सीख देते हैं


    जो लडकियां पतंग उडाती हैं
    तो उनसे ये भी कहा जता है कि
    भले कोई ढील दे
    तुम्हें अपनी डोर खीचके ही रखनी है


    हाँ लड़किया पतंग उडाती है
    पर क्या पता उसे आसमान निगलता
    या धरती खाती है
    शाम होते गगन में आवारा पतंगे रहती हैं

    11 टिप्‍पणियां:

    1. लोहिड़ी पर्व और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाये!

      उत्तर देंहटाएं
    2. बहुत् सुंदर कविता लोहिड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाये!

      उत्तर देंहटाएं
    3. नि:संदेह बहुत ही बढ़िया कविता है. बांटने के लिए आभार.

      उत्तर देंहटाएं
    4. लोहङी और पतंग का, उत्सवमय है मेल.
      लङकी इसमें आ मिली, रोचक बन गया खेल.
      बहुत ही रोचक खेल,काव्य बिम्बों से भरा है.
      कल्पना काफ़ी गहरी है, और शिल्प खरा है.
      यह साधक बन गया प्रशंसक इस कविता का.
      उत्सवमय है मेल, लोहङी और पतंग का.


      समस्त ब्लागरों को लोहङी की शुभ कामनायें.

      उत्तर देंहटाएं
    5. एक ही समय में दो-दो तरफ इशारा करती आपकी कविता पसंद आई ...

      उत्तर देंहटाएं
    6. कोई पतंग
      कोई पोस्‍ट
      और बाकी
      सब
      उड़ा रहे हैं
      टिप्‍पणियां।

      उत्तर देंहटाएं
    7. waah .........bahut hi gahan abhivyakti .........patang ke madhyam se ladkiyon ke hala tbayan ka rdiye.

      उत्तर देंहटाएं
    8. बहुत ही सुन्दर कविता..खासकर अगर एक पुरुष द्वारा लिखी गयी हो...लड़कियों के जीवन की सच्चाई को को पतंग के माध्यम से अच्छा उकेरा आपने...

      उत्तर देंहटाएं
    9. आदरणीय शास्त्री जी शुभकामनाओ के लिये आभार.
      भाटिया जी का प्यार पहले भी मिलता रहा है आज भी मिला. बहुत बहुत आभार.
      काजल भाई, आपको ये कविता पसन्द आई तो मुझे भी खुशी हुई. आभार.
      साधक जी आपने काव्यमय टिपणी करके दिल खुश कर दिया. अभार.
      राजीव भाई इशारा दो तरफ़ हो बात एक ही है. कविता दिल से लिखी है. दिल से ही की गई तारीफ़ के लिये आभार.
      अविनाश भाई पोस्ट के बहाने पतन्ग य पतन्ग के बहाने पोस्ट बात तो एक ही है कोई लूट सके तो लूट. प्यार के लिये आभार.
      वन्दना जी हालात आज भी वही है हा धीरे धीरे हो रहे परिवर्तन क भी स्वागत है.
      रश्मि जी जैसे आपका लिखा सिर्फ़ स्त्रीवादी नही होता वैसे ही मै पुरुष्वादी लेखन नही करता. लेखक को इन पूर्वाग्रहो से मुक्त होना ही चाहिये.
      सभी को मकर सन्क्रन्ति की ढेरो शुभकामना

      उत्तर देंहटाएं
    10. असली पतंग तो लडकियां ही उडाती हैं. लड़के तो गली में बस लूटने में ही लगे रहते हैं. :)
      मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाये !

      उत्तर देंहटाएं
    11. असली पतंग तो लडकियां ही उडाती हैं. लड़के तो गली में बस लूटने में ही लगे रहते हैं. :)
      मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाये !

      उत्तर देंहटाएं

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz