हंसने कि बारी है !

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  • विवेक शर्मा
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  • एक बार एक समाज सेवक मृतु  के पश्चात यमलोक पहुंचा तो वहां उसने कई प्रकार की दीवार घड़ी देखीं ,जो विभिन्न गति से चल रही थीं !उसने यमराज से कारण पूछा,तो यमराज बोले " ये विभिन्न देशों कि घड़ियाँ हैं ,जिस देश में जितना ज्यादा भ्रस्टाचार, उतनी उसकी गति !" उस व्यक्ति ने नजर दौड़ाई लेकिन कहीं उसे भारत कि घड़ी नजर न आई ,उसने यमराज से पूछा "बताओ भारत कि घड़ी न लगाने की कितनी घूस खाई!" तब यमराज बोले "नाराज क्यों होते हो मेरे भाई मेरे कमरे में जाकर देखो ,वह तो मेरे पंखे का काम कर रही है !"

    10 टिप्‍पणियां:

    1. apan ka to har jagah danka hei...vishav guru jo tehre hum...aapka blog mujhe behad acha laga.

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