इनसान हुआ मतलब का यारो

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  • राजीव तनेजा
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    इस से सच्चा उस से झूठा...

    तुम से मीठा  हम से कड़वा

    इनसान हुआ मतलब का यारो

    जाने वो कितने रंग  बदलता है

     

    इस पल तोशा  उस पल माशा

    हर क्षण सैंकड़ों अक्स बदलता है

    इनसान हुआ मतलब का यारो

    जाने वो कितने ढंग बदलता है

     

    इससे छीना उससे झपटा

    इसको लूटा उसको काटा

    इनसान हुआ पत्थर का यारो

    देखो...

    अब पत्थर में वो रब्ब ढूँढता है

    ***राजीव तनेजा***

    10 टिप्‍पणियां:

    1. यार क्यो सच बोलते हो... मै तो इंसानो को ढुढने निकला तो पता चला मै हैवानो की बस्ती मै आ गया... कोई तो मुझे भी रास्ता दिखाओ...............

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    2. सच्चे झूठे तोला माशा में फितरत बदलने वालों के बीच भी कभी कभी अच्छे सच्चे इंसान मिल ही
      जाते हैं..!!

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    3. वो इंसान ही क्‍या
      इंसान
      जिसने मतलब साधा नहीं


      उसने ही तो सिद्ध किया है
      पत्‍थर में रब बसता है।

      मानते सब कारनामे अपने
      ये अपनी करतूतों पर हंसता है।

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    4. तनेजाजी,
      आपने दर्पण दिखाया है और दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता.........
      बधाई !

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    5. इससे छीना उससे झपटा
      इसको लूटा उसको काटा
      इनसान हुआ पत्थर का यारो देखो...
      अब पत्थर में वो रब्ब ढूँढता है

      राजीव तनेजा जी।
      आपने सही लिखा है।

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    6. अच्छा एवं सटीक प्रहार है आज के इंसान पर ...

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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