कहाँ हो कृष्ण?

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  • पुष्कर पुष्प
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  • हे कृष्ण...हे कृष्ण....! शूरमाओं से भरी महफिल में जब एक 'अबला' स्त्री की इज्जत नीलाम हो रही थी और वहां बैठे एक भी 'मर्द' की मर्दानगी नहीं जागी, तो उसने अपनी अंतिम आस 'भाई' को गुहार लगाई, फिर उसकी लाज बचाने कृष्ण आ गए...यहां भी एक अबला का चीरहरण हो रहा था और सब के सब उसी तरह तमाशबीन बने हुए थे। आर्यावर्त की इस धरती पर सैंकड़ों लोगों के बीच न तो किसी की आत्मा ने उस अबला की दर्द भरी आवाज सुनी और न ही किसी ने कलयुग का कृष्ण बनकर उसकी इज्जत बचाई. बस इस 'चीरहरण' को पब्लिक बड़े चाव से देखती रही. पूरा लेख आप मीडिया ख़बर.कॉम पर पढ़ सकते हैं। यहाँ क्लिक करें।

    4 टिप्‍पणियां:

    1. bahut hi sundar post...bas wahi ek krishana hi hai jo sansaar ki laaj bachane aayega

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    2. Rightly said sir,This is not only shameful but alarming not only for individuals but for whole socitety.
      No body has a right to deside and declare any one characterless.
      Good question raised.Keep talking on this issue.
      Regards,
      Dr.Bhoopendra

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    3. जिस पत्रकार बन्धु के ब्लांग से आपने खबड़े ली हैं उनके लिए और आपके लिए भी सच जानाना जरुरी हैं मीडिया के खबड़ों पर भावूक होने की जरुरत नही हैं जो बिकता हैं वही दिखता हैं ।(भाई साहब आप पटना में काम कर रहे हो मीडिया कर्मियों की तरह आप भी खबर को मसालेदार तरीके से ही पेश किया ।सच तो यह हैं की अगर कृष्ण जैसा भाई उस भीड़ में नही रहता तो उस महिला की सरेआम बलात्कार हो जाती ।जिस सीआईएसएफ के जवान की तारीफ करते हुए आपने आज खबड़ छापी हैं उस सच को सामने लाने में इतनी देरी क्यों की। मीडिया से जुड़े हैं किसी चैनल वाले से फुटेज लेकर देख ले उस भीड़ में दर्जनों कृष्ण मिल जायेगे।)

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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