सामाजिक प्राणी हैं मास्टरजी!!!

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  • Murari Pareek
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  • मास्टरजी का नाम सुनते ही एक अपनत्व की भावना आ जाती है, और गांवों में तो मास्टरजी का वर्चश्व पूरा छाया हुआ है | | हर साल एक साधारण आदमी से मास्टरजी की श्रेणी में तब्दील होने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है | अब तो स्थिति ऐसी है की गाँव में आदमी कम और मास्टरजी ज्यादा हो गए हैं | एक बार किसी कुते ने मास्टरजी को काट लिया, लोग चिंता प्रकट करते हुए बोले : इस कुते को मरवाना होगा आज मास्टरजी को काटा है कल को किसी आदमी को भी काट सकता है | आदमी और मास्टरजी ?? पता नहीं क्यूँ गांव वाले फर्क करते हैं !! मास्टरजी की बिटिया की शादी होती है, गाँव पुरे जोशे खरोश से काम में जुट जाता है | मास्टरजी ने शादी में बहुत पैसा लगाया बिटिया की शादी में गांव में चर्चा : अरे दहेज़ की गाडियां तो भरनी ही थी आखिर मास्टरजी हैं | अब अगर किसी मास्टरजी ने साधारण शादी की दहेज़ ज्यादा नहीं दे पाए, गाँव में फिर चर्चा : बेचारा कहाँ से दहेज़ की गाडियां भरेगा ? आखिर मास्टर ही तो है | सामाजिक अनुष्ठान में मास्टरजी की अहम् भूमिका होती है | घर में किसी पशुधन को कुछ तकलीफ है मास्टरजी कष्ट निवारण करते हैं| किसी के घर जागरण है पांच सात मास्टरजी को बुलवा लिया जाता है | हर क्षेत्र में अहम् भूमिका निभाता मास्टरजी सबका प्यारा मास्टरजी | धापली की शादी थी बरात आई सभी काम काज में व्यस्त | एक बच्चा रोये जा रहा था, और बच्चे ने पोटी भी कर रखी थी | किसी का ध्यान बच्चे की और नहीं गया | एक बाराती दयालु सज्जन ने बच्चे को उठाया साफ़ किया | फिर उसकी माता को ढूंड कर बच्चा उनके हवाले किया महिला बोली: धन्यवाद मास्टरजी !!!! आदमी के आश्चर्य का ठिकाना न था बोला: आपको कैसा पता की मैं मास्टरजी हूँ ? औरत बोली : इतना सामाजिक और कोण हो सकता है !! मास्टरजी अपने हैं, मास्टरजी सबके प्यारे सबके दुलारे हैं !!

    1 टिप्पणी:

    1. अच्छे होते हैं, मास्टर जी, अगर न हों तो हमारे जैसे (अब जैसे भी हैं) लोग न होते.

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