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सूर्य दिवस भी है मन मतलब मन का दिवस कविता अविनाश वाचस्पति

 
##SunMon

आज सिर्फ १३ दिसम्बर ही नहीं
सन यानी सूर्य दिवस भी है
मन मतलब मन का दिवस भी है

वैसे आने वाले कल मायने १४
दिसम्बर २०१५ को जन्मदिन
के ५७ बरस पूरे होने को हैं
और
मेरे शरीर से क्रानिक हेपेटाइटिस
सी ने सी फोर चिपटन से दे दी है
मुक्ति
अब अपना रहा हूँ युक्ति ताकि
कमजोरी तथा डायबिटीज भी
मेरे शरीर रूपी घर को खाली करें।
- अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई 
मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६.
 — celebrating my birthday at Nehru Plac भी है

वैसे आने वाले कल मायने १४
दिसम्बर २०१५ को जन्मदिन
के ५७ बरस पूरे होने को हैं
और
मेरे शरीर से क्रानिक हेपेटाइटिस
सी ने सी फोर चिपटन से दे दी है
मुक्ति
अब अपना रहा हूँ युक्ति ताकि
कमजोरी तथा डायबिटीज भी
मेरे शरीर रूपी घर को खाली करें।
- अविनाश वाचस्पति मुन्नाभाई
मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६.
 — celebrating my birthday at Nehru Place

57वें जन्मदिवस पर अविनाश वाचस्पति ने अपने आवास साहित्यकार सदन, संत नगर, नयी दिल्ली ११००६५ में प्रात: ९ बजे नाश्ते की व्यवस्था की है। आप सभी सादर आमंत्रित हैं। कृपया शर्मायें नहीं, कड़ाके की ठंड से।
अविनाश वाचस्पति का मोबाइल फोन नंबर ९५६०९८१९४६
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आज हंसी दिवस है, खूब खिलकर खिलखिलायें

हंसी दिवस हो सबका जन्‍मदिवस
अब तक जिन्‍होंने दी है जन्‍मदिन पर मेरे शुभकामना, नहीं भी दी है पर लाईन में लगे हैं, बहुत सारे तो अपनी नींद में बेसुध सोये हैं, जागकर देंगे, यह निश्‍चय कर के सोये हैं, सबका नंबर आयेगा, पर मैं तो कुछ काम कर लूं, धन्‍यवाद, शुक्रिया, खुशामदीद अपना सबको अर्पण कर दूं। 

कुछ कहना चाहें तो माउस से यहां पर क्लिकिलायें 
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पाबला जी, नदिया-जल, वृक्ष-फल...खुशदीप

नदिया न पीए कभी अपना जल,
वृक्ष न खाए कभी अपने फल,
अपने तन का,मन का, धन का दूजों को जो दे दान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


अगर किसी का तन जले और दुनिया को मीठी सुहास दे
दीपक का उसका जीवन है जो दूजों को अपना प्रकाश दे,
धर्म है जिसका भगवद् गीता, सेवा ही वेद-कुरान है,
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है,
नदिया न पीए कभी अपना जल...


चाहे कोई गुणगान करे, चाहे करे निंदा कोई,
फूलो से कोई सत्कार करे या काटे चुभा जाए कोई,
मान और अपमान ही दोनों जिसके लिए समान है
वो सच्चा इनसान अरे इस धरती का भगवान है...
नदिया न पीए कभी अपना जल...






पाबला जी ने अपनी ज़िंदगी के फ़लसफ़े को चरितार्थ करता हुआ भजन आज अपनी पोस्ट पर दिखाया-सुनाया...इस भजन का एक-एक शब्द जीवन में उतारने लायक है...पाबला जी ने क्या कमाया है, ये आज उनके जन्मदिन पर ब्लॉग जगत में चारों तरफ से उमड़े प्यार और सम्मान ने साबित कर दिया है...मैं इस पोस्ट के ज़रिए प्रस्ताव करता हूं कि आज से हर साल 21 सितंबर को पाबला डे के तौर पर मनाया जाए...
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