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मनीष तिवारी ने ‘भारतीय सिनेमा का सफरनामा’ पुस्‍तक का विमोचन किया

सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष तिवारी ने आज यहां ‘भारतीय सिनेमा का सफरनामा’ पुस्‍तक का विमोचन किया। इस अवसर पर फिल्‍म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अभिनेत्री... दिव्‍या दत्‍ता और अभिनेता पवन मल्‍होत्रा भी मौजूद थे। यह पुस्‍तक भारतीय सिनेमा की यात्रा के बारे में भारतीय फिल्‍मी- हस्तियों द्वारा लिखे गए लेखों का संकलन है। इस पुस्‍तक का प्रकाशन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन प्रभाग द्वारा किया गया है।

इस पुस्‍तक में 9 साक्षात्कार और 22 लेख है। महेश भट्ट ने सिनेमा की प्रवृत्तियों पर अपने विचार लिखे हैं, तो गुलजार ने राजनीतिक सिनेमा पर अपनी टिप्‍पणियों से योगदान दिया है। जाने-माने फिल्‍म निर्माता मुज्‍जफ़र अली, एन. चंद्रा, रमेश सिप्‍पी, दीप्‍ति नवल, ख़य्याम और रेमी डिसूजा़ ने इस पुस्‍तक के लिए अपने साक्षात्कार दिए हैं। डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, ए. के. बीर, तिगमांशु धुलिया, प्रसून जोशी, कैलाश खेर और पंकज शुक्‍ल ने पौराणिक सिनेमा, सिनेमैटोग्राफी, नया सिनेमा, संगीत और गीत तथा सिनेमा के तकनीकी पहलू जैसे विभिन्‍न विषयों पर लेख लिखे हैं।

क्षेत्रीय सिनेमा भाग में 8 लेख और साक्षात्कार हैं। इस भाग के प्रारंभ में प्रसिद्ध असमिया फिल्‍म निर्माता जाह्नू बरूआ, पंजाबी फिल्‍म निर्माता गुरवीर ग्रेवाल, भोजपुरी अभिनेता दिनेशलाल यादव ‘निरहुवा’, बंगाली निर्देशक कौशिक गांगुली और प्रोफेसर अभिजीत कुंडु ने भी इस भाग के लिए अपना योगदान दिया है। प्रसिद्ध पत्रकार के. वी. कुरमानाथ, एन. विद्याशंकर और मनमोहन चड्डा ने विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में क्षेत्रीय सिनेमा के महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर लेख लिखे हैं। पुस्‍तक के अंतिम भाग में जाने-माने पत्रकारों और लेखकों के महत्‍वपूर्ण विषयों पर लेख हैं। अजय ब्रह्मात्‍मज, प्रदीप सरदाना, मीनाक्षी शर्मा, अजय कुमार, अविनाश वाचस्‍पति, इकबाल रिज़वी, देब प्रकाश चौधरी और कई अन्‍य ने भारतीय सिनेमा की यात्रा से संबंधित विभिन्‍न विषयों पर लेख लिखे हैं। इन विषयों में- 21वीं शताब्‍दी का सिनेमा, राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार, फिल्‍म प्रचार, पोस्‍टर, स्‍टूडियो, महिला फिल्‍म निर्माता, थियेटर और सिनेमा तथा भारतीय सिनेमा में हास्‍य जैसे अनेक विषय शामिल हैं।
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देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार


देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता-2010 के पुरस्कार दिए गए। प्रथम पुरस्कार के लिए दिल्ली के मोहम्मद साकिब खान, दूसरे पुरस्कार के लिए गुड़गांव की सविता और तीसरे पुरस्कार के लिए दिल्ली की ही गौरी श्रीवास्तव के निबंधों को चुना गया। अन्य 10 बच्चों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए। ये हैं- पूर्वा, प्रियम स्नेह, चारुता गुप्ता, ऋषभ गर्ग, सौहार्द डोभाल, राजा विक्रम, मो. अनस ‘राजा’, कु. उमा देवी, दुष्यंत कुमार फेकर और शुभम तिवारी।

सभी विजेता बच्चों को प्रमाण पत्रों के साथ पुरस्कार राशि भी दी गई। ये पुरस्कार, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सलाम बालक ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती प्रवीण नायर ने दिए। तेरह विजेता बच्चों में सोनभद्र, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश), सीवान (बिहार), दुर्ग (छत्तीसगढ़), उत्तरकाशी (उत्तराखंड), टोंक (राजस्थान), पटना (बिहार), भोपाल (मध्य प्रदेश), रांची (झारखंड) जैसे दूर शहरों के प्रतियोगी भी शामिल हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नीति एवं प्रशासन) श्री खुर्शीद अहमद गनई समारोह में विशेष अतिथि थे।

बाल दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में इस बार विषय रखा गया था- 'बढ़ते लोग, घटता पानी'। देश भर के करीब एक हजार स्कूली बच्चों ने इसमें भाग लिया। निबंधों का मूल्यांकन भाषा, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति के आधार पर किया गया।

मुख्य अतिथि श्रीमती प्रवीण नायर ने समाज के वंचित बच्चों के साथ अपने काम के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बच्चों को बधाई देते हुए आशा जताई कि वे पढ़-लिख कर जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करेंगे और समाज की बेहतरी के प्रयास करेंगे।

विशिष्ट अतिथि श्री गनई ने कहा कि तकनीकी विकास का पढ़ने की अभिरुचि पर बुरा असर नहीं पड़ने देना चाहिए, बल्कि तकनीक को इसे बढ़ावा देने का औजार ही बना लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अब तकनीक से दूर रहने का कोई औचित्य नहीं है।

दूरदर्शन न्यूज के महानिदेशक समाचार, श्री एस एम खान भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रकाशन विभाग की अपर महानिदेशक श्रीमती अरविंद मंजीत सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि बालभारती की प्रसार संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। पिछले 63 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही बाल भारती मनोरंजक और ज्ञानवर्धक के साथ ही यह पत्रिका बच्चों और किशोरों की प्रतिभा के विकास के लिए रचनात्मक अभियान भी चलाती रहती है।। वार्षिक निबंध और नियमित चित्रकला प्रतियोगिताएं और दूसरी गतिविधियां इसी अभियान का हिस्सा हैं जो बच्चों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा देती हैं। इसमें पाठकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। बदलते समय के साथ पत्रिका का कलेवर, प्रस्तुतीकरण भी बदला है। फिर भी पत्रिका की कीमत सिर्फ आठ रुपए है।

 सूचना और प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग ने इस अवसर पर बच्चों की रुचि के अनुरूप सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

बाल भारती पत्रिका के वरिष्ठ संपादक श्री वेदपाल ने कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन किया।

बालभारती के अलावा, हर वर्ग और और भाषा-भाषी के लिए किफायती दरों पर पठनीय सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ प्रकाशन विभाग हर माह 13 भारतीय भाषाओं में कुल 18 पत्रिकाएं छापता है। राष्ट्रीय विकास को दर्शाती 'योजना' पत्रिका 13 भाषाओं में निकलती है। इसके अलावा विभाग हिंदी और अंग्रेजी में ग्रामीण विकास की पत्रिका 'कुरुक्षेत्र', तथा हिंदी, और उर्दू में साहित्यिक पत्रिका 'आजकल’ का प्रकाशन भी करता है। रोजगार समाचार (हिंदी और उर्दू) तथा एंप्लॉयमेंट न्यूज (अंग्रेजी) इसके विशिष्ट पाक्षिक हैं जो बेहतर रोजगार चुनने और पाने में युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।

नुक्‍कड़ समूह बाल भारती पत्रिका के इस सफल प्रयास की सराहना करता है और सब बच्‍चों को बधाई देता है कि वे अपनी रचनात्‍मक प्रतिभा के विकास में और भी बढ़ चढ़कर भाग लें। जो बच्‍चे हिन्‍दी ब्‍लॉग लेखन के संबंध में जानने के इच्‍छुक हों, वे भी nukkadh@gmail.com पर ई मेल संदेश भेजकर अपनी रुचि जाहिर कर सकते हैं।
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